TVS Motor Company ने फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) मार्केट में टॉप पोजिशन हासिल कर ली है। कंपनी ने इस दौरान करीब 3,30,145 यूनिट्स की बिक्री की, जो कि 39% की ज़बरदस्त ग्रोथ दिखाता है। यह 3 लाख यूनिट्स सालाना बिक्री का आंकड़ा पार करना एक बड़ा माइलस्टोन है।
यह जीत सिर्फ बिक्री की नहीं, बल्कि एक बड़े बदलाव का संकेत है। पुरानी और स्थापित कंपनियाँ, जैसे TVS Motor, Bajaj Auto और Ather Energy, अब उन नई और 'क्रांतिकारी' स्टार्टअप्स से आगे निकल रही हैं, जिन्हें कभी बाज़ार में तूफ़ान लाने वाला माना जाता था। Bajaj Auto इस लिस्ट में 2,76,518 यूनिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि Ather Energy ने लगभग 2,29,565 यूनिट्स बेचकर तीसरा स्थान हासिल किया। ये कंपनियाँ अपने सप्लाई चेन पर मज़बूत पकड़, बड़े सर्विस नेटवर्क और ग्राहकों के भरोसे का फायदा उठा रही हैं। बाज़ार का ध्यान अब 'फैमिली मोबिलिटी' पर शिफ्ट हो गया है, जहाँ विश्वसनीयता, आराम और व्यावहारिकता परफॉरमेंस से ज़्यादा अहम हैं। TVS iQube, Bajaj Chetak और Ather Rizta जैसे मॉडल्स इस ट्रेंड को लीड कर रहे हैं।
FY26 में E2W रिटेल सेगमेंट ने साल-दर-साल 17.3% की ग्रोथ देखी और मार्च 29 तक 1.35 मिलियन यूनिट्स तक पहुँच गया, जो फाइनेंशियल ईयर के अंत तक लगभग 1.5 मिलियन यूनिट्स तक पहुँच सकता है। लेकिन यह ग्रोथ अब कुछ चुनिंदा कंपनियों में सिमट गई है। Ather Energy ने जहां 75% की मज़बूत ग्रोथ दिखाई, वहीं Ola Electric जैसी कंपनी, जो कभी सबसे आगे थी, अब भारी गिरावट का सामना कर रही है। Ola Electric का वॉल्यूम FY25 के 3,44,000 यूनिट्स से घटकर 1,60,558 यूनिट्स रह गया, जो 53% से भी ज़्यादा की भारी गिरावट है। इस गिरावट का मुख्य कारण सर्विस से जुड़ी दिक्कतें और सप्लाई की समस्याएँ बताई जा रही हैं। यह दिखाता है कि बाज़ार में अब 'ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन' यानी काम को सही ढंग से करने की क्षमता ही असली 'डिफरेंसिएटर' (अंतर पैदा करने वाली चीज़) है।
BGauss Auto (24,816 यूनिट्स, 43% ग्रोथ) और Greaves Electric (Ampere) जैसी कुछ स्टार्टअप्स ने भी विश्वसनीयता और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट पर ध्यान देकर लगातार बढ़त दर्ज की है। Hero MotoCorp का Vida ब्रांड तेज़ी से आगे बढ़ा, जिसने 184% की छलांग लगाकर 1,38,558 यूनिट्स की बिक्री की। इससे पता चलता है कि पुरानी ऑटो कंपनियों के लिए भी EV ग्रोथ में तेज़ी लाना संभव है, अगर उनकी प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी सही हो। बाज़ार के परिपक्व होने का मतलब है कि सिर्फ इनोवेटिव प्रोडक्ट ही काफी नहीं, बल्कि सॉलिड एग्जीक्यूशन भी ज़रूरी है।
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि खरीदारों का नज़रिया साफ बदल गया है। शुरुआती दौर के ग्राहक जो नए ई-वाहन आजमा रहे थे, अब कम हो गए हैं। आज का भारतीय खरीदार अपने पेट्रोल-डीज़ल वाहनों को ऐसे इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म से बदलना चाहता है जो रोज़मर्रा की यात्रा के लिए सहज हो। यह ट्रेंड कम्यूटर-केंद्रित मॉडल्स के शानदार प्रदर्शन से साफ दिखता है। जैसे-जैसे इकोसिस्टम आगे बढ़ रहा है, प्रोडक्ट परफॉरमेंस में निरंतरता और भरोसेमंद आफ्टर-सेल्स सपोर्ट, परफॉरमेंस मेट्रिक्स से ज़्यादा अहम साबित हो रहे हैं। यह 'व्यावहारिक दिशा' अब सभी कंपनियों की प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी को नया आकार दे रही है।
बाज़ार में ग्रोथ के बावजूद, जोखिम बने हुए हैं। Ola Electric का मार्केट शेयर तेज़ी से गिरना, एग्जीक्यूशन में विफलता के बड़े खतरे की चेतावनी देता है। जबकि Ola Electric को IPO के बाद अच्छी वैल्यूएशन मिली थी, उसकी ऑपरेशनल गलतियों ने वॉल्यूम में भारी गिरावट लाई और बाज़ार में उसकी स्थिति को नुकसान पहुँचाया। इसके विपरीत, TVS Motor जैसी कंपनियों ने सप्लाई और सर्विस की मांगों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
प्रतिस्पर्धा का माहौल कड़ा बना हुआ है। TVS Motor का मार्केट कैप करीब ₹1.78 ट्रिलियन है जिसका P/E लगभग 30.68 है, वहीं Bajaj Auto का मार्केट कैप ₹2.49 ट्रिलियन और P/E 28.45 है। इन बड़ी कंपनियों पर लगातार इनोवेट करने और कुशलता से स्केल करने का दबाव है। Ather Energy, अपनी ग्रोथ के बावजूद, अभी भी -3% EBITDA मार्जिन पर काम कर रही है, जो बताता है कि सफल स्टार्टअप्स के लिए भी मुनाफे का रास्ता चुनौतीपूर्ण है। सरकारी इंसेंटिव पर निर्भरता और बदलते रेगुलेटरी माहौल जैसे बाहरी जोखिम भी बने हुए हैं। FY27 के लिए ऑटो इंडस्ट्री में ग्रोथ के अनुमान कम हो गए हैं, जिसमें टू-व्हीलर सेगमेंट में 3-8% की ग्रोथ का अनुमान है, जो इंसेंटिव-संचालित विस्तार के बाद सामान्यीकरण का संकेत है।
भविष्य की ओर देखें तो, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में मज़बूत ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। CRISIL का अनुमान है कि FY27 में E2W वॉल्यूम 20-22% बढ़ेगा, जो इंटरनल कम्बशन इंजन टू-व्हीलर्स के लिए अनुमानित 4-6% ग्रोथ से काफी ज़्यादा है। मार्केट लीडर्स जैसे TVS Motor के लिए एनालिस्ट्स का नज़रिया काफी सकारात्मक बना हुआ है, जिनका औसत 12 महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹4,175.00 है। Bajaj Auto को भी सकारात्मक एनालिस्ट रेटिंग्स मिली हैं। इस सेगमेंट का भविष्य उन कंपनियों द्वारा तय होगा जो तेज़ ग्रोथ बनाए रखने के साथ-साथ मज़बूत ऑपरेशनल एग्जीक्यूशन, शानदार सर्विस नेटवर्क और बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं (व्यावहारिकता और विश्वसनीयता) के अनुकूल ढलने की क्षमता रखती हैं। फायदा अब सिर्फ पहले आने वाले को नहीं, बल्कि उन कंपनियों को होगा जो तेज़ी से स्केल कर सकती हैं, अच्छी सर्विस दे सकती हैं और बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं।