भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट जून 2026 में **62.5%** की जोरदार ग्रोथ के साथ **1.81 लाख** यूनिट तक पहुंच गया। TVS Motor ने **44,467** रजिस्ट्रेशन के साथ अपनी पहली पोजिशन बरकरार रखी है, वहीं Bajaj Auto और Hero MotoCorp के Vida ब्रांड तेजी से मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं। दूसरी तरफ, Ola Electric के रजिस्ट्रेशन में बड़ी गिरावट आई है, जो मैन्युफैक्चरर्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को साफ दिखाता है।
क्या हुआ?
जून 2026 में भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट ने दमदार ग्रोथ दिखाई है। कुल 1.81 लाख व्हीकल रजिस्ट्रेशन हुए, जो पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 62.5% ज्यादा है। TVS Motor Company ने 44,467 रजिस्ट्रेशन के साथ मार्केट में अपनी बादशाहत कायम रखी। कुल मार्केट में 24.5% शेयर के साथ कंपनी टॉप पर बनी हुई है, हालांकि पिछले साल की तुलना में प्रतिशत शेयर में मामूली कमी आई है।
मार्केट शेयर में बदलाव
इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेस में मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। Bajaj Auto 40,576 रजिस्ट्रेशन के साथ दूसरे नंबर पर रहा। कंपनी का मार्केट शेयर बढ़कर 22.4% हो गया है, जो दिखाता है कि वे लीडर TVS Motor के करीब पहुंच रहे हैं।
इसी तरह, Hero MotoCorp के सपोर्ट वाले Vida ब्रांड ने भी अच्छी ग्रोथ दिखाई है। इसने 20,198 यूनिट्स रजिस्टर कीं, जिससे इसका मार्केट शेयर पिछले साल के 7.1% से बढ़कर 11.2% हो गया। Ather Energy भी 29,422 रजिस्ट्रेशन और 16.2% मार्केट शेयर के साथ तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, Ola Electric के रजिस्ट्रेशन घटकर 15,096 यूनिट रह गए, और मार्केट शेयर 18.6% (जून 2025) से गिरकर 8.3% पर आ गया।
निवेशकों के लिए प्रतिस्पर्धा क्यों मायने रखती है?
यह डेटा निवेशकों के लिए दो बड़ी बातें बताता है। पहला, ओवरऑल मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जो सेक्टर के लिए पॉजिटिव है। दूसरा, मार्केट में दबदबा सिर्फ शुरुआती कंपनियों का नहीं रह गया है, बल्कि बड़े और स्थापित प्लेयर्स जैसे कि TVS, Bajaj, Hero का दबदबा बढ़ रहा है, जिनके पास मजबूत डीलरशिप नेटवर्क और सर्विस सेंटर हैं।
ज्यादा बिक्री के आंकड़े अच्छे होते हैं, लेकिन निवेशक अक्सर यह देखते हैं कि क्या कंपनियां मार्केट शेयर के लिए होड़ में प्रॉफिट मार्जिन बनाए रख सकती हैं। जब कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए डिस्काउंट बढ़ाती हैं या आक्रामक प्राइस कट्स करती हैं, तो इससे उनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव पड़ सकता है। अगले कुछ क्वार्टर्स में वॉल्यूम ग्रोथ और अच्छे मार्जिन में संतुलन बनाना एक अहम फैक्टर होगा।
पुरानी कंपनियां बनाम स्टार्टअप
मौजूदा डेटा दिखाता है कि पारंपरिक ऑटो मैन्युफैक्चरिंग अनुभव वाली कंपनियां जोर पकड़ रही हैं। इन फर्मों को अक्सर प्रोडक्शन बढ़ाने और सप्लाई चेन को मैनेज करने में फायदा होता है, जो ऑटो इंडस्ट्री में बहुत जरूरी है। Ola Electric जैसी स्टार्टअप कंपनियां, जिन्हें शुरुआती बढ़त मिली थी, अब इन स्थापित मैन्युफैक्चरर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही हैं।
निवेशकों को आगे क्या देखना चाहिए?
आने वाले महीनों में निवेशकों को तीन मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- प्रॉफिट मार्जिन: मैनेजमेंट से यह जानने की कोशिश करें कि क्या मौजूदा बिक्री वॉल्यूम बिना ज्यादा डिस्काउंट के टिकाऊ है।
- प्रोडक्शन कैपेसिटी: जैसे-जैसे मार्केट बढ़ रहा है, लंबी वेटिंग पीरियड के बिना व्हीकल डिलीवर करने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
- नए प्रोडक्ट लॉन्च: देखें कि विभिन्न कंपनियां फीचर्स, रेंज और प्राइसिंग पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपने पोर्टफोलियो को कैसे अपडेट करती हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि कौन अगले खरीदारों को आकर्षित करेगा।
