दिल्ली की EV पॉलिसी से TVS Motor को मिलेगी गति?
नई दिल्ली सरकार की नई ड्राफ्ट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी से EV को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस पॉलिसी के तहत, अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल टू-व्हीलर का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा, जिससे TVS Motor जैसी कंपनियों को सीधे तौर पर फायदा होगा। कंपनी ने मार्च 2026 में 49,453 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर रजिस्टर किए, जो मार्केट में उसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
हाई वैल्यूएशन पर निवेशक चिंतित
अपनी मजबूत EV सेल्स के बावजूद, TVS Motor का वैल्यूएशन निवेशकों के लिए एक बड़ा सवाल है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 63-84 के बीच था, जो Bajaj Auto (~27-31), Maruti Suzuki (~26-29) और Eicher Motors (34-44) जैसे प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में काफी ज्यादा है। यह हाई वैल्यूएशन बताता है कि निवेशक पहले से ही कंपनी से भविष्य में बड़ी ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, खासकर EV सेगमेंट में।
13 अप्रैल, 2026 को दिल्ली पॉलिसी की घोषणा के तुरंत बाद TVS Motor के शेयर 3-5% गिरे, जबकि Ather Energy जैसी पूरी तरह EV पर फोकस करने वाली कंपनियों के शेयर 8% तक बढ़े। यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि निवेशक पॉलिसी के लॉन्ग-टर्म फायदों के साथ-साथ TVS Motor के हाई वैल्यूएशन और उसके मौजूदा पेट्रोल इंजन वाले व्हीकल बिजनेस पर संभावित असर का भी आकलन कर रहे हैं।
प्रतिस्पर्धियों और एनालिस्ट्स की राय
फाइनेंशियल ईयर 2026 में, TVS Motor ने Bajaj Auto (290,000 यूनिट्स) और Ather Energy (240,000 यूनिट्स) से ज्यादा EV टू-व्हीलर बेचे। Ather Energy, जिसने मई 2025 में IPO लाया था, प्रीमियम EV सेगमेंट में एक मुख्य चैलेंजर के रूप में उभरी है। वहीं, Ola Electric की मार्केट शेयर में गिरावट आई है और एनालिस्ट्स ने इसके हाई एक्सपेंस और लॉसेस को देखते हुए 'सेल' रेटिंग दी है।
ज्यादातर एनालिस्ट्स TVS Motor को लेकर पॉजिटिव हैं और ₹4,500 (Motilal Oswal) और ₹4,200 (Emkay) जैसे टारगेट प्राइस दे रहे हैं। कंपनी अपनी EV प्रोडक्ट लाइन का विस्तार करने और नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना बना रही है। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स हाई वैल्यूएशन को देखते हुए 'होल्ड' रेटिंग देने की सलाह दे रहे हैं।
ब्रॉडर मार्केट और इंफ्रास्ट्रक्चर चुनौतियां
ओवरऑल ऑटो इंडस्ट्री में FY27 में ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने का अनुमान है, ICRA के अनुसार 3-6% की बढ़ोतरी हो सकती है। EV एडॉप्शन तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, चार्जर की रिलायबिलिटी और स्टैंडर्ड्स जैसे मुद्दे बनी हुई हैं। भारत को 2030 तक 1.3 मिलियन से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी। साथ ही, Hyundai Motor India जैसी कंपनियां बढ़ती कमोडिटी कीमतों के कारण कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही हैं, जो EV की अफोर्डेबिलिटी और कंपनी के प्रॉफिट पर असर डाल सकता है।