TVS Motor और Bajaj Auto ने Q1 FY27 में शानदार नतीजे पेश किए हैं। एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और प्रीमियम बाइक्स की बढ़ती मांग के चलते दोनों कंपनियों के मुनाफे में ज़बरदस्त उछाल आया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में भी इन कंपनियों ने अच्छी पकड़ बनाई है, जिसने कंपनी के मुनाफे को और बढ़ाया है।
Detailed Coverage
TVS Motor का शानदार प्रदर्शन
TVS Motor ने इस तिमाही में ₹13,896 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 37.8% ज़्यादा है। कंपनी की कुल बिक्री वॉल्यूम में 27.7% का इजाफा हुआ, और प्रति यूनिट औसत बिक्री मूल्य में 8% की वृद्धि देखी गई। सबसे अहम बात यह है कि नेट प्रॉफिट (Net Profit) में 51.4% की जोरदार बढ़ोतरी हुई है। कंपनी का स्कूटर सेगमेंट, जिसमें पारंपरिक इंजन और इलेक्ट्रिक मॉडल दोनों शामिल हैं, अब कुल बिक्री का 40% हिस्सा रखता है। वहीं, TVS की iQube इलेक्ट्रिक स्कूटर की कुल बिक्री 10 लाख यूनिट के पार पहुंच गई है।
Bajaj Auto की ग्रोथ और मार्जिन
Bajaj Auto के रेवेन्यू में भी तिमाही के दौरान 37% का साल-दर-साल इजाफा हुआ है। कंपनी के EBITDA (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) में 45% की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद इसका ऑपरेटिंग मार्जिन 45 बेसिस पॉइंट बढ़ा। नेट प्रॉफिट ₹3,000 करोड़ रहा, जिसमें अन्य आय (Other Income) का भी अच्छा योगदान रहा। Bajaj Auto का EV डिवीजन, जिसमें Chetak इलेक्ट्रिक स्कूटर शामिल है, अब मुनाफे में आ गया है और लो डबल-डिजिट EBITDA मार्जिन हासिल कर रहा है। कंपनी सितंबर से पहले 10 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी में है।
एक्सपोर्ट का दम और सेक्टर का आउटलुक
घरेलू मांग में चुनौतियों का सामना करते हुए, दोनों कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहा। TVS Motor के एक्सपोर्ट में 32% की वृद्धि देखी गई, जिसमें अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों का योगदान 26% रहा। इसी तरह, Bajaj Auto ने 7.32 लाख यूनिट एक्सपोर्ट किए और अगले दो सालों में मिड-टीन एक्सपोर्ट ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। दोनों कंपनियां इस मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने में निवेश कर रही हैं।
हालांकि Q1 के नतीजे दमदार रहे, लेकिन कंपनियों को कुछ जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। सप्लाई चेन में संभावित रुकावटें और भू-राजनीतिक अस्थिरता एक्सपोर्ट वॉल्यूम को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, घरेलू बिक्री ग्रामीण मांग पर निर्भर करती है, जो मानसून की चाल से प्रभावित हो सकती है। महंगाई का दबाव भी एक बड़ा फैक्टर बना हुआ है, क्योंकि कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि होने पर कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिसका असर भविष्य की बिक्री और मुनाफे पर पड़ सकता है।
