Suzuki Motor Corp ने अपनी कार डेवलपमेंट की रफ्तार दोगुनी करने का फैसला किया है। 2030 तक कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी को बढ़ाकर **40 लाख** यूनिट सालाना करने जा रही है, ताकि चीन की ऑटो कंपनियों को कड़ी टक्कर दी जा सके।
चीन की रफ्तार का मुकाबला
ऑटो सेक्टर में तेजी से बदलते दौर को देखते हुए Suzuki Motor Corp ने अपनी ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग रणनीति में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। अब तक एक नई कार को डेवलप करने में कंपनी को 48 महीने का समय लगता था, जिसे घटाकर 2030 तक 24 महीने करने का लक्ष्य रखा गया है। यह फैसला मुख्य रूप से BYD और Xiaomi जैसी चीनी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के बीच लिया गया है, जो बेहद कम समय में बाजार में नए मॉडल उतार रही हैं।
भारत बनेगा ग्रोथ का इंजन
Suzuki के लिए उसका भारतीय सब्सिडियरी, Maruti Suzuki, सबसे अहम है। कंपनी ने भारत को अपना मुख्य ग्रोथ इंजन मानते हुए यहाँ अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 40 लाख यूनिट सालाना तक पहुँचाने की योजना बनाई है। यह कदम भारतीय ग्राहकों की बदलती पसंद, खासकर मॉडर्न फीचर्स और इलेक्ट्रिक ऑप्शन की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।
चुनौतियां और कॉम्पिटिशन
लेगेसी ऑटोमेकर होने के नाते, 24 महीने के डेवलपमेंट साइकिल पर शिफ्ट होना कंपनी के लिए एक बड़ा तकनीकी चैलेंज है। इसमें डिजिटल टूल्स के बेहतर उपयोग और सप्लाई चेन मैनेजमेंट में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत होगी। इसके अलावा, भारतीय बाजार में Tata Motors, Mahindra और Hyundai जैसी कंपनियों के साथ भी कड़ी टक्कर है, जो पहले से ही नए प्लेटफॉर्म्स में भारी निवेश कर रही हैं।
निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सुजुकी इन नए प्लांट को कितनी जल्दी सेटअप करती है और भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है।
