Suzuki Motor ने अपने भारतीय सप्लायर्स को सितंबर 2027 तक कामकाज में बड़े बदलाव के निर्देश दिए हैं। कंपनी अब सप्लायर्स से 20 घंटे प्रतिदिन और हफ्ते में 6 दिन काम करने के लिए कह रही है, ताकि 2030 तक **40 लाख** वाहनों के सालाना उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
40 लाख कारों के लक्ष्य की तैयारी
Maruti Suzuki ने 2030 तक सालाना 40 लाख गाड़ियां बनाने का मेगा प्लान तैयार किया है। फिलहाल कंपनी की क्षमता लगभग 29 लाख यूनिट्स की है और पिछले फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने 23.4 लाख से ज्यादा यूनिट्स का उत्पादन किया था। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को स्टैंडर्ड बना रही है। अब मशीनों को 24/7 चलाने के बजाय, कंपनी ने रोजाना 4 घंटे का मेंटेनेंस ब्रेक और हफ्ते में एक दिन का डाउनटाइम अनिवार्य कर दिया है ताकि भविष्य में अचानक काम रुकने की समस्या न हो।
सप्लायर्स पर बढ़ेगा फाइनेंशियल दबाव
इस फैसले का असर भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियों पर सीधा पड़ेगा। अब तक कई सप्लायर्स अपनी मशीनों का मैक्सिमम इस्तेमाल करके मार्जिन बनाए रखते थे, लेकिन अब काम के घंटे कम होने से उन्हें अपनी कैपेसिटी बढ़ानी होगी। इसके लिए सप्लायर्स को नई फैक्ट्रियां लगाने या नई मशीनें खरीदने में अतिरिक्त कैपेक्स (Capex) खर्च करना पड़ सकता है।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब सप्लायर्स पहले से ही रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तगड़े कॉम्पिटिशन से जूझ रहे हैं। अगर सप्लायर्स अपनी लागत को कंट्रोल नहीं कर पाए या कैपेसिटी बढ़ाने में देरी हुई, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
कॉम्पिटिशन और मार्केट रिस्क
भारतीय ऑटो बाजार में Tata Motors और Mahindra & Mahindra के साथ कड़ा मुकाबला है। Suzuki का यह दांव लंबी अवधि में स्थिरता के लिए तो सही है, लेकिन इसका दारोमदार पूरी तरह से सप्लायर्स के एग्जीक्यूशन पर है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या सप्लायर्स अगले 2 साल में इस बदलाव के साथ तालमेल बिठा पाते हैं या फिर इससे प्रोडक्शन में शॉर्ट-टर्म रुकावटें आती हैं।
