सुप्रीम कोर्ट का अहम दखल
सुप्रीम कोर्ट ने Raghuvanshi Investments Private Ltd (RIPL) के बोर्ड की उन अहम फैसलों पर तत्काल रोक लगा दी है, जो 18 मई को होने वाली मीटिंग में होने थे। कोर्ट का यह फैसला 14 मई, 2026 को सुनाया गया, जिसमें RIPL को नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति और बैंक सिग्नेट्री बदलने जैसे प्रस्तावों पर आगे बढ़ने से रोक दिया गया है। इस रोक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कपुर परिवार के बीच चल रही उत्तराधिकार की मध्यस्थता (mediation) प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके।
मध्यस्थता पर कोर्ट का जोर
रानी कपूर के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि इन बदलावों से मध्यस्थता के दौरान कंट्रोल शिफ्ट हो सकता है। वहीं, प्रिया कपूर और RIPL के वकीलों का कहना था कि यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों का पालन करने के लिए जरूरी है। लेकिन जस्टिस पारदीवाला की बेंच ने साफ किया कि ऐसे बड़े फैसले मध्यस्थता को 'सीधे तौर पर प्रभावित' कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा, "अभी किसी के हाथ में कुछ नहीं है।" यह फैसला RIPL को फिलहाल अपने बोर्ड या बैंक अथॉरिटी में कोई बदलाव करने से रोकता है।
संपत्ति विवाद और Sona BLW का भविष्य
यह पूरा मामला कपुर परिवार के बीच लगभग ₹30,000 से ₹45,000 करोड़ की विशाल संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर चल रहा एक जटिल विवाद है। इस विवाद की मध्यस्थता पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई. चंद्रचूड़ कर रहे हैं।
कंपनी की मजबूत परफॉरमेंस और गवर्नेंस रिस्क
Sona BLW Precision Forgings, भारतीय ऑटो कंपोनेंट्स इंडस्ट्री में एक मजबूत खिलाड़ी है, जिसकी मार्केट वैल्यू करीब ₹36,500 करोड़ है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए ₹640.17 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल से 6.48% ज्यादा है। कंपनी की सेल्स में भी 25.48% का शानदार उछाल देखने को मिला है। Sona BLW खासकर इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहनों के लिए पुर्जे बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो सेक्टर के भविष्य के लिए अहम है।
प्रमोटर ग्रुप में अनिश्चितता
हालांकि, कंपनी की कारोबारी परफॉरमेंस अच्छी है, लेकिन कपुर परिवार का यह अंदरूनी झगड़ा प्रमोटर ग्रुप के लिए एक बड़ी गवर्नेंस चिंता पैदा कर रहा है। कोर्ट के इस बयान कि "अभी किसी के हाथ में कुछ नहीं है", RIPL में एक महत्वपूर्ण गवर्नेंस गैप को दर्शाता है। यह अनिश्चितता Sona BLW की नई रणनीतियों, पार्टनरशिप या मर्जर-एक्विजिशन योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
शेयर की चाल और आगे क्या?
Sona BLW के शेयर फिलहाल ₹590 के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जो अपने 52-हफ्ते के हाई ₹614 के काफी करीब हैं। यह दिखाता है कि बाजार इस जोखिम को कुछ हद तक पहले ही भांप चुका है। अब सबकी नजरें मध्यस्थता की प्रक्रिया पर टिकी हैं। पूर्व CJI डी.वाई. चंद्रचूड़ की देखरेख में होने वाली यह मध्यस्थता तय करेगी कि RIPL बोर्ड के मामले सुलझते हैं या नहीं। अगर यह विवाद आगे लंबा खिंचता है, तो कंपनी के वैल्यूएशन पर और असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का औसत टारगेट प्राइस ₹619.14 है, लेकिन वे भी प्रमोटर डिस्प्यूट के जोखिम को लेकर सतर्क हैं।
