Studds Accessories अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए ₹150 करोड़ एक नया मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा रही है। कंपनी का लक्ष्य FY27 तक ₹750 करोड़ का रेवेन्यू हासिल करना है, जो हाई-एंड सेफ्टी गियर की बढ़ती डिमांड और यूरोप में एक्सपोर्ट बढ़ने पर आधारित है।
क्या हुआ है?
Studds Accessories ने फरीदाबाद में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए ₹150 करोड़ के कैपिटल इन्वेस्टमेंट की घोषणा की है। यह प्रोजेक्ट पांच एकड़ में फैला होगा और इसे दो फेज में बनाया जाएगा। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य प्रीमियम हेलमेट्स और राइडिंग एक्सेसरीज की प्रोडक्शन को बढ़ाना है। कंपनी इस विस्तार के जरिए घरेलू बाजार में हाई-एंड मोटरसाइकिल गियर की बढ़ती मांग और अपने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय एक्सपोर्ट बिजनेस, दोनों को पूरा करने की तैयारी में है।
ग्रोथ की रणनीति और रेवेन्यू टारगेट
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए ₹750 करोड़ का रेवेन्यू टारगेट सेट किया है, जो 16-18% की ग्रोथ रेट दर्शाता है। मैनेजमेंट का लक्ष्य जल्द ही कुल सालाना रेवेन्यू को ₹1,000 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचाना है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, Studds अपने बिजनेस फोकस को बेसिक कम्यूटर हेलमेट्स से हटाकर हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर ले जा रही है। इसमें कंपनी अपने प्रीमियम SMK ब्रांड में निवेश कर रही है, जो अंतरराष्ट्रीय ECE 22.06 सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरा करता है। यह यूरोप के जर्मनी, फ्रांस और यूके जैसे बाजारों में पैठ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है।
प्रीमियम गियर की ओर क्यों बढ़ रहा है बाजार?
भारत में हेलमेट का बाजार सालाना वॉल्यूम और वैल्यू के हिसाब से लगभग ₹3,500 करोड़ का अनुमानित है। इसमें एक खास ट्रेंड प्रीमियम की ओर बढ़ना है, जो हाई-परफॉर्मेंस वाली मोटरसाइकिल की बढ़ती लोकप्रियता के कारण प्रेरित है। राइडर्स अब सर्टिफाइड, हाई-एंड सेफ्टी इक्विपमेंट में निवेश करने के लिए ज्यादा इच्छुक हैं। जहां पहले ₹5,000 का हेलमेट प्रीमियम माना जाता था, वहीं अब ₹10,000 और उससे ऊपर की कीमत वाले गियर की मजबूत मांग देखी जा रही है। Studds इसी बदलाव का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है और अपने प्रोडक्ट इकोसिस्टम को बढ़ाते हुए सिर्फ हेलमेट्स ही नहीं, बल्कि टूरिंग लगेज, कम्युनिकेशन डिवाइसेस और अन्य एक्सेसरीज को भी शामिल कर रही है।
एक्सपोर्ट और ऑपरेशनल सिनेरियो
एक्सपोर्ट कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया है, जिसकी ग्रोथ फिलहाल सालाना 30% से ज्यादा है। इटली में सीधी मौजूदगी स्थापित करके और यूरोप में डीलर-आधारित रणनीति का उपयोग करके, Studds मध्यस्थों पर अपनी निर्भरता कम कर रही है। फरीदाबाद का नया प्लांट ऑटोमेशन और मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी को बढ़ाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कॉम्पिटिशन बनाए रखने के लिए जरूरी है, जहां सेफ्टी सर्टिफिकेशन और डिजाइन क्वालिटी अनिवार्य हैं।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशक दो फेज वाले कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूशन पर नजर रख सकते हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लागत में कोई बढ़ोतरी या देरी न हो। चूंकि यह निवेश कंपनी के सालाना रेवेन्यू का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए कर्ज के स्तर और कैश फ्लो पर इसके प्रभाव पर नजर रखना अहम होगा। इसके अलावा, नॉन-हेलमेट एक्सेसरीज के वास्तविक योगदान को ट्रैक करना - जो कंपनी को उम्मीद है कि कुल रेवेन्यू के 10% से बढ़कर 15-17% हो जाएगा - यह समझने में मदद करेगा कि क्या पूरा राइडिंग इकोसिस्टम बनाने की रणनीति सफल हो रही है। अंत में, कॉम्पिटिटिव यूरोपीय बाजार में अपनी एक्सपोर्ट ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने की कंपनी की क्षमता एक महत्वपूर्ण बिंदु बनी रहेगी।
