ग्लोबल ऑटो दिग्गज Stellantis ने भारत में अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को तीन गुना करने का ऐलान किया है। अब कंपनी सालाना **18,000** की जगह **50,000** गाड़ियां बनाएगी, जिसका बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट किया जाएगा।
बड़े विस्तार की रणनीति
अपनी 'FaSTLAne 2030' स्ट्रैटेजी के तहत Stellantis अब भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में इस्तेमाल करने जा रही है। कंपनी अपनी कुल प्रोडक्शन का लगभग 60% हिस्सा विदेशों में भेजेगी। इस विस्तार के लिए कंपनी तमिलनाडु के थिरुवल्लुर स्थित अपने मौजूदा प्लांट का ही इस्तेमाल करेगी, जिससे ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर किया जा सके।
क्यों है यह बदलाव जरूरी?
कंपनी के लिए थिरुवल्लुर प्लांट की भूमिका बेहद अहम है। CK Birla Group की कंपनी, हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉरपोरेशन के साथ 2017 से साझेदारी के बाद से ही यह प्लांट मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र रहा है। कॉमन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके कंपनी अलग-अलग प्रोडक्शन लाइन पर होने वाले खर्च को बचाना चाहती है।
निवेशकों के लिए क्या है चुनौती?
Stellantis ने भारत में अब तक लगभग €1 अरब का निवेश किया है। हालांकि, भारत के ऑटो मार्केट में Jeep और Citroën जैसे ब्रांड्स की घरेलू बिक्री अभी भी बड़ी कंपनियों के मुकाबले काफी कम है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या कंपनी अपनी बढ़ी हुई क्षमता का इस्तेमाल स्थानीय बाजार में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने और नए मॉडल लॉन्च करने में कितनी तेजी से कर पाती है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी का एक्सपोर्ट ऑर्डर और नए प्रोडक्ट्स का पाइपलाइन ही शेयर की दिशा तय करेगा।
