Stellantis ने हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से तिरुवल्लूर प्लांट की बाकी हिस्सेदारी खरीदकर पूर्ण मालिकाना हक हासिल कर लिया है। कंपनी का लक्ष्य **2028** तक सालाना प्रोडक्शन को **160%** बढ़ाना है, जिसके लिए एक्सपोर्ट पर विशेष फोकस रहेगा।
प्लांट का पूर्ण मालिकाना हक
Stellantis ने CK Birla Group की कंपनी, हिंदुस्तान मोटर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से अपनी तिरुवल्लूर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की बची हुई हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। 2017 से चली आ रही इस साझेदारी के खत्म होने के बाद, अब भारतीय परिचालन पर कंपनी का पूर्ण नियंत्रण होगा। इस कदम का उद्देश्य ग्लोबल प्रायोरिटीज के साथ स्थानीय ऑपरेशंस को बेहतर ढंग से एकीकृत करना है।
160% प्रोडक्शन बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
कंपनी ने अपने प्रोडक्शन कैपेसिटी को 2026 में 16,000 यूनिट्स से बढ़ाकर 2028 तक 43,000 यूनिट्स के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है। तिरुवल्लूर प्लांट में फिलहाल Citroën C3 और Basalt जैसे मॉडल्स बन रहे हैं। लगभग 95% कंपोनेंट्स के लोकलाइजेशन के साथ, कंपनी इस प्लांट को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाना चाहती है, जहां से चार महाद्वीपों में गाड़ियां भेजी जाएंगी। भारत में कंपनी का कुल निवेश €1 बिलियन (लगभग ₹9,000 करोड़ से अधिक) को पार कर चुका है।
क्या है चुनौतियां?
भारतीय ऑटो सेक्टर बेहद प्रतिस्पर्धी है। Maruti Suzuki, Hyundai और Tata Motors जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के बीच Citroën को अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी क्षमता का विस्तार करने में सबसे बड़ी चुनौती फिक्स्ड कॉस्ट की है। यदि प्रोडक्शन का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है। कंपनी 2028 तक अपने वर्कफोर्स को भी दोगुना यानी 1,200 कर्मचारियों से ज्यादा करने की योजना बना रही है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह नई क्षमता वास्तविक सेल्स और एक्सपोर्ट वॉल्यूम में तब्दील हो पाती है या कंपनी को कैपेसिटी यूटिलाइजेशन से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
