रिकॉर्ड फाइनेंशियल्स पर मालिकाना हक के विवाद का साया
Sona Comstar ने फाइनेंशियल ईयर 2026 और मार्च तिमाही के लिए शानदार रिकॉर्ड रेवेन्यू और प्रॉफिट के आँकड़े पेश किए हैं, लेकिन यह सब मालिकाना हक को लेकर चल रहे एक जटिल, मल्टी-ईयर कानूनी विवाद के बीच हुआ है।
FY26 की चौथी तिमाही (Q4) में Sona Comstar का रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 47% बढ़कर ₹1,272 करोड़ हो गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹4,475 करोड़ रहा। कंपनी का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) Q4 में 32% बढ़कर ₹311 करोड़ रहा, जो 24.4% के मार्जिन पर है। तिमाही के लिए नेट प्रॉफिट 17% बढ़कर ₹192 करोड़ दर्ज किया गया। इस शानदार ग्रोथ में बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा, जिसने Q4 के कुल रेवेन्यू का रिकॉर्ड 39% हिस्सा दिया। कंपनी ने FY26 के अंत में लगभग ₹23,700 करोड़ के वैल्यूएशन वाले 10 साल के ऑर्डर बुक के साथ मजबूत स्थिति दर्ज की।
अप्रैल 2026 तक, Sona Comstar का शेयर लगभग ₹607.25 पर कारोबार कर रहा था, और इसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹37,700 करोड़ के करीब थी। शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई ₹613.10 के करीब बना हुआ है।
गवर्नेंस की चुनौतियां और ऑपरेशनल मजबूती
लेकिन इन बेहतरीन नतीजों पर मालिकाना हक को लेकर चल रहे एक जटिल कानूनी विवाद का साया मंडरा रहा है। यह विवाद Sona Group के प्रमोटर एंटिटी Aureus Investment के कंट्रोल को लेकर है, जिसमें 28.02% हिस्सेदारी है। यह जंग मुख्य रूप से रानी कपूर, जो परिवार की मुखिया हैं, और दिवंगत चेयरमैन संजय कपूर की विधवा प्रिया सचदेव कपूर के बीच चल रही है।
कंपनी के मैनेजमेंट, जिसमें MD और ग्रुप CEO विवेक विक्रम सिंह शामिल हैं, का कहना है कि यह विवाद सिर्फ ओनरशिप लेवल पर है और ऑपरेशंस, स्ट्रैटेजी या गवर्नेंस पर इसका 'कोई असर नहीं' है। हालांकि, यह लंबा कानूनी झगड़ा अनिश्चितता पैदा करता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एस्टेट पर किसी भी बदलाव पर रोक लगा दी है, और सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का सुझाव दिया है, पर कोई स्पष्ट समाधान अभी बाकी है। मैनेजमेंट का कहना है कि रानी कपूर 2019 से शेयरहोल्डर नहीं हैं, हालांकि उनके कानूनी वकील इस दावे पर सवाल उठाते हैं।
पीयर्स के मुकाबले वैल्यूएशन
Sona Comstar वर्तमान में अपने पीयर कंपनियों की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 59-61x है, जो Samvardhana Motherson (लगभग 42x) और Bosch Ltd (लगभग 39x) जैसे प्रतिस्पर्धियों से काफी अधिक है। यह वैल्यूएशन EV कंपोनेंट्स मार्केट में कंपनी की मजबूत स्थिति और डिफरेंशियल गियर ( 8.1% ) और स्टार्टर मोटर्स ( 4.2% ) में इसके महत्वपूर्ण बाजार हिस्सेदारी (CY23 तक) पर आधारित है। पर, इतना ऊंचा P/E रेश्यो किसी भी भविष्य के ऑपरेशनल व्यवधान या ग्रोथ में मंदी के जोखिम को बढ़ा देता है।
इंडस्ट्री के रुझान: अवसर और चुनौतियां
भारतीय ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके 2025 से 2030 तक 14.8% की CAGR से बढ़ने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण इलेक्ट्रिफिकेशन और बढ़ती वाहन मांग है। विश्लेषकों का अनुमान है कि FY27 में यह सेक्टर 7-9% बढ़ेगा, हालांकि पैसेंजर व्हीकल की बिक्री पिछले साल की मजबूत तेजी के बाद 3-5% की दर से धीमी हो सकती है।
जबकि इलेक्ट्रिफिकेशन एक मजबूत ड्राइवर बना हुआ है, भू-राजनीतिक घटनाओं से संभावित सप्लाई चेन में व्यवधान और FY27 में ग्रोथ का सामान्य स्तर पर लौटना इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां पेश करता है। Sona Comstar का रेलवे में विस्तार और अगली पीढ़ी के EV कंपोनेंट्स पर फोकस इन ट्रेंड्स का फायदा उठाने के लिए इसे अच्छी स्थिति में रखता है, लेकिन प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
एनालिस्ट की राय और भविष्य की योजनाएं
Sona Comstar के लिए एनालिस्ट सेंटीमेंट मिले-जुले हैं, टारगेट प्राइस काफी भिन्न हैं, जो भविष्य की ग्रोथ और वैल्यूएशन पर अलग-अलग विचारों को दर्शाते हैं। हालांकि कई एनालिस्ट 'Buy' या 'Outperform' रेटिंग बनाए हुए हैं, कुछ को मौजूदा स्तरों से सीमित और बढ़त या संभावित गिरावट दिखती है।
भविष्य की ओर देखते हुए, Sona Comstar हाई-वोल्टेज ट्रैक्शन मोटर्स और इनवर्टर में विस्तार करने, सस्पेंशन मोटर की बिक्री बढ़ाने, रेलवे कारोबार को बढ़ाने और स्ट्रेटेजिक अधिग्रहण की तलाश करने की योजना बना रहा है। कंपनी की रणनीति का जोर मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता को मिलाकर एक व्यापक मोबिलिटी टेक्नोलॉजी कंपनी बनना है, ताकि भविष्य के इंडस्ट्री बदलावों के अनुकूल ढल सके।
