भारत बनेगा Skoda का एक्सपोर्ट हब?
Skoda India एक प्रैक्टिकल अप्रोच अपना रही है। कंपनी का मानना है कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने की रफ्तार फिलहाल डिमांड (Demand) से ज़्यादा रेगुलेशन (Regulation) की वजह से है। इसलिए, वो पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाली कारों पर अपना फोकस बनाए रखेगी, जो अभी भी मार्केट का बड़ा हिस्सा हैं। साथ ही, कंपनी भविष्य में EVs को इंटीग्रेट (Integrate) करने की भी तैयारी कर रही है। एक बड़ा डेवलपमेंट यह है कि आने वाला India-EU Free Trade Agreement (FTA) भारत को Skoda की कारों के लिए यूरोप का एक्सपोर्ट हब (Export Hub) बना सकता है।
EV की मांग कम, नियम आगे
Skoda India के ब्रांड डायरेक्टर आशीष गुप्ता (Ashish Gupta) का कहना है कि भारत में EV को अपनाना ज़्यादातर सरकारी नियमों (Government Regulations) की वजह से हो रहा है, न कि ग्राहकों की मांग (Customer Demand) से। उनका अनुमान है कि 2030 तक, कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी सिर्फ़ 18% रहेगी, जबकि बाकी 82% पर पारंपरिक ICE गाड़ियां हावी रहेंगी। मौजूदा मार्केट डेटा के अनुसार, EV की पैठ (Penetration) लगभग 4-4.5% पर स्थिर हो गई है, जो पहले के अनुमानों से काफ़ी कम है।
दमदार सेल्स ग्रोथ, ICE मॉडल्स का जलवा
Skoda Auto India ने साल 2025 में 100% से ज़्यादा की ज़बरदस्त ग्रोथ दर्ज की है। कंपनी ने 72,665 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल के 35,166 यूनिट्स की तुलना में काफ़ी ज़्यादा हैं। इसमें कॉम्पैक्ट SUV Kylaq का बड़ा योगदान रहा, जिसने लगभग 45,000 यूनिट्स की बिक्री की। इसी तरह, कंपनी ने नई Kushaq SUV भी लॉन्च की है, जो पेट्रोल इंजन पर चलती है। यह दिखाता है कि कंपनी ICE गाड़ियों के बड़े मार्केट पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है।
EU ट्रेड डील से एक्सपोर्ट को बूस्ट
आने वाला India-EU Free Trade Agreement (FTA) Skoda के लिए एक डबल फायदा लेकर आ सकता है। यह न सिर्फ़ यूरोप से आने वाली कारों पर टैक्स को कम कर सकता है, बल्कि भारत को यूरोप के लिए Skoda वाहनों का एक्सपोर्ट बेस (Export Base) भी बना सकता है। गुप्ता ने बताया कि Kylaq जैसी गाड़ियां एक्सपोर्ट के लिए एक प्रमुख मॉडल हो सकती हैं, क्योंकि यूरोप के कुछ मार्केट इस तरह के वाहनों के लिए खुले हैं। इस FTA में कुछ सुरक्षा उपाय भी शामिल हैं, जैसे कि €15,000 (लगभग ₹20 लाख ऑन-रोड) की न्यूनतम आयात कीमत (Minimum Import Price), ताकि लोकल प्रोडक्शन (Local Production) को सस्ते इम्पोर्ट (Import) होने वाले वाहनों से सुरक्षित रखा जा सके।
भू-राजनीतिक तनाव का असर?
हालांकि, हाल ही में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) जैसे कि इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष का Skoda India के ग्राहक इंटरेस्ट या बुकिंग पर फ़िलहाल कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा है। फिर भी, एक अंतर्निहित अनिश्चितता बनी हुई है, जो लंबे समय में बिज़नेस एनवायरनमेंट (Business Environment) के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
इंडस्ट्री में क्या है स्थिति?
Skoda का यह बैलेंस्ड (Balanced) अप्रोच इंडस्ट्री में हो रहे बड़े बदलावों को दर्शाता है। Tata Motors पहले से ही 70% मार्केट शेयर के साथ EV स्पेस में लीड कर रही है, जबकि Hyundai धीरे-धीरे अपनी EV रेंज बढ़ा रही है। दूसरी ओर, Maruti Suzuki जैसी बड़ी ICE निर्माता कंपनियां भी हाइब्रिड टेक्नोलॉजी (Hybrid Technology) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं और इस दशक के अंत में अपनी पहली EV लॉन्च करने की योजना बना रही हैं।
आगे की राह
Skoda India आने वाले समय में ICE व्हीकल सेगमेंट में ग्रोथ जारी रखने की उम्मीद कर रही है, जो फ़िलहाल मार्केट का मुख्य आधार है। कंपनी EV सेगमेंट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए भी अपनी रणनीति विकसित कर रही है, जिसे वह बाज़ार की स्थितियों और रेगुलेटरी बदलावों के हिसाब से आगे बढ़ाएगी। India-EU FTA का सफल कार्यान्वयन (Implementation) नई एक्सपोर्ट ऑपर्च्युनिटीज (Export Opportunities) खोलेगा और भारत को ग्लोबल मार्केट के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग हब (Manufacturing Hub) के तौर पर स्थापित करेगा।