SEBI का कड़ा कदम
सबसे पहले बात करते हैं SEBI के ऐक्शन की। रेगुलेटर SEBI ने 5 फरवरी, 2026 को एक ऑर्डर जारी कर Setco Automotive के कुछ डायरेक्टर्स और पूर्व CEO पर कार्रवाई की है। इन पर भारी पेनल्टी (जुर्माना) लगाई गई है, और कुछ को 1-2 साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित (बैन) भी कर दिया गया है। इसके अलावा, उन्हें कंपनी और उसकी सब्सिडियरी से प्राप्त फंड को 23% सालाना ब्याज के साथ वापस चुकाने का भी आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई पिछले फाइनेंशियल ईयर में रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन्स (Related Party Transactions) से जुड़े SEBI के नियमों का पालन न करने के आरोपों को लेकर हुई है।
वित्तीय नतीजे चिंताजनक
कंपनी के वित्तीय नतीजे भी बेहद चिंताजनक हैं। Q3 FY26 की बात करें तो 10.8% की बढ़ोतरी के साथ ₹196.55 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज हुआ, लेकिन कंसोलिडेटेड नेट लॉस पिछले साल के ₹(34.42) करोड़ से बढ़कर ₹(57.18) करोड़ हो गया। वहीं, 9 महीनों (9M FY26) में भी कंसोलिडेटेड नेट लॉस ₹104.51 करोड़ से बढ़कर ₹140.69 करोड़ तक पहुंच गया। हालांकि, स्टैंडअलोन लेवल पर कंपनी ने प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन ग्रुप के गहरे कंसोलिडेटेड घाटे पर बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
गवर्नेंस और ऑडिट पर सवाल
कंपनी की गवर्नेंस और बैलेंस शीट को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। दो सब्सिडियरी, SETCO Auto Systems Private Limited (SASPL) और Lava Cast Private Limited (LCPL), ने 'मटेरियल अनसर्टेनिटी रिलेटेड टू गोइंग कंसर्न' (Material Uncertainty related to Going Concern) की चेतावनी दी है। इसका सीधा मतलब है कि ये कंपनियां अपनी वित्तीय देनदारियों को पूरा करने या आगे काम जारी रखने की स्थिति में नहीं हो सकतीं। ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि कंसोलिडेटेड रिजल्ट्स के महत्वपूर्ण हिस्से, जिसमें ₹74,217 लाख के एसेट्स भी शामिल हैं, के लिए उन्हें मैनेजमेंट द्वारा सर्टिफाइड (प्रमाणित) अनऑडिटेड जानकारी पर भरोसा करना पड़ा है। इससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। इसके अतिरिक्त, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) की मैच्योरिटी को ₹574.50 करोड़ तक बढ़ाकर मार्च 2026 तक कर दिया गया है, जो कंपनी की लिक्विडिटी (नकदी) की समस्या का संकेत देता है।