सरकारी पॉलिसी का कमाल!
यूनियन कैबिनेट से दिल्ली-NCR क्षेत्र में पुराने ट्रकों और बसों को हटाने के लिए ₹9,585 करोड़ के इंसेंटिव पैकेज को मंजूरी मिलने के बाद बाजार में खुशी की लहर दौड़ गई। इस स्कीम का मकसद करीब 2.07 लाख पुराने, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को नए BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलना है। सरकारी संपत्तियों के लिए ई-ऑक्शन (e-auction) कराने वाली MSTC के शेयर में अच्छी तेजी देखी गई, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि ऑक्शन वॉल्यूम बढ़ेगा। वहीं, MMTC के शेयरों में भी उछाल आया, क्योंकि मेटल ट्रेडिंग में इसकी भूमिका और स्क्रैप की सप्लाई बढ़ने की उम्मीदों से निवेशक उत्साहित दिखे।
पॉलिसी कितनी असरदार?
भले ही यह स्कीम बड़े अमाउंट की है, लेकिन असल में कितने पुराने वाहन बदले जाएंगे, यह देखना होगा। अभी वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग का इंफ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) तैयार हो रहा है। MSTC की 50/50 जॉइंट वेंचर, Mahindra MSTC Recycling Private Limited (MMRPL), इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही है। मगर, बाजार का उत्साह शायद Dismantling सेंटरों की स्थापना की हकीकत से कहीं आगे है। पिछले अनुभव बताते हैं कि ऐसी पॉलिसियां कुछ समय के लिए तो तेजी लाती हैं, पर MSTC जैसी कंपनियों का लॉन्ग-टर्म वैल्यूएशन (long-term valuation) उनके ई-कॉमर्स (e-commerce) सर्विसेज, जैसे कोल और मिनरल ब्लॉक अलॉटमेंट (mineral block allocations) से ज्यादा जुड़ा है, न कि सिर्फ व्हीकल स्क्रैपेज (vehicle scrappage) से।
इन बातों का भी रखें ध्यान!
निवेशकों को इस रैली की टिकाऊपन पर संदेह करना चाहिए। MMTC मुख्य रूप से एक ट्रेडिंग कंपनी है और स्क्रैपेज सेक्टर से इसका जुड़ाव अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है; इसका मुख्य फोकस कीमती धातुओं और कमोडिटी ट्रेडिंग (commodity trading) पर है। पिछली फाइनेंशियल रिपोर्ट्स (financial disclosures) में हाई ट्रेड रिसीवेबल्स (high trade receivables) और सरकारी फरमानों पर भारी निर्भरता के जोखिमों को उजागर किया गया है, जो मार्जिन (margin) को अस्थिर बना सकते हैं। इसके अलावा, MSTC, जो सरकारी ई-ऑक्शन में 'डीम्ड मोनोपॉली' (deemed monopoly) स्टेटस रखती है, उसे भी हाई एम्प्लॉई बेनिफिट कॉस्ट (high employee benefit costs) और बिजनेस मॉडल की स्वाभाविक साइक्लिकलिटी (cyclicality) का सामना करना पड़ता है। इस स्क्रैपेज स्कीम का सिर्फ दिल्ली-NCR जैसे एक क्षेत्र पर निर्भर रहना, कुल बाज़ार को सीमित करता है और क्षेत्रीय पर्यावरण नीतियों में बदलाव से रेवेन्यू (revenue) पर असर पड़ सकता है।
आगे क्या?
ब्रोकरेज हाउस (Brokerage sentiment) की राय मिली-जुली है, और फिलहाल स्टॉक की परफॉरमेंस फंडामेंटल (fundamental re-ratings) से ज्यादा मोमेंटम (momentum) से चल रही है। स्कीम की सफलता वाहन मालिकों की भागीदारी पर निर्भर करेगी, जिन्हें फिलहाल ब्याज सबवेंशन (interest subventions) और फ्यूल वाउचर (fuel vouchers) दिए जा रहे हैं। भविष्य में MSTC के प्लेटफॉर्म पर लगातार, हाई-मार्जिन ऑक्शन वॉल्यूम का प्रमाण और MMTC के नॉन-प्रीशियस मेटल डिवीजनों (non-precious metal divisions) के लिए प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) का स्पष्ट रास्ता ही निवेशकों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
