शेयर रॉकेट की तरह भागा, बनाया नया रिकॉर्ड
Sansera Engineering के शेयरों ने आज शेयर बाज़ार में तहलका मचा दिया। स्टॉक अपने अब तक के सबसे ऊँचे स्तर ₹2,137.35 को पार कर गया। पिछले 11 ट्रेडिंग सत्रों में इसमें करीब 30% का उछाल देखा गया है। यह शानदार परफॉरमेंस कंपनी के Q3 FY26 के नतीजों के बाद आई है, जिसने निवेशकों का भरोसा और बढ़ा दिया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 25% बढ़कर ₹907.7 करोड़ हो गया। वहीं, EBITDA ₹163.9 करोड़ रहा, और मार्जिन तिमाही-दर-तिमाही 80 बेसिस पॉइंट बढ़कर 18.1% पर पहुँच गए। इसके अलावा, नेट प्रॉफिट (PAT) 23% बढ़कर ₹69.4 करोड़ रहा, भले ही नए लेबर लॉज़ से जुड़े ₹16 करोड़ के एक खास खर्चे का असर पड़ा हो। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन करीब ₹11,500-11,900 करोड़ के आसपास पहुँच गया है।
इंटरनेशनल बिज़नेस बना ग्रोथ का बड़ा इंजन
Sansera Engineering की इस ज़बरदस्त परफॉरमेंस के पीछे कंपनी के इंटरनेशनल बिज़नेस का बड़ा हाथ है। यह सेगमेंट पिछले साल के मुकाबले 60% की शानदार ग्रोथ के साथ अपने सबसे अच्छे तिमाही प्रदर्शन पर पहुँचा है। खासकर सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस सेक्टर से कंपनी को जबरदस्त बूस्ट मिला है। अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट 50.5% बढ़ा है, जिसकी वजह एयरोस्पेस ऑर्डर का तेज़ी से पूरा होना है। बाकी देशों में भी एक्सपोर्ट में तीन गुना बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी के पास कुल मिलाकर करीब ₹2,410 करोड़ का ऑर्डर बुक है, और उम्मीद है कि अगले तीन सालों में रेवेन्यू अपने चरम पर होगा। भारतीय ऑटो एंसिलरी सेक्टर, जिसका मूल्य FY25 में ₹6.7 लाख करोड़ से ज़्यादा था और एक्सपोर्ट $23 बिलियन तक पहुंचा था, इस समय ज़बरदस्त डिमांड साइकिल से गुज़र रहा है। FY26 में इस सेक्टर में 7-9% की ग्रोथ का अनुमान है।
US-India ट्रेड डील का मिलेगा फायदा
हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट Sansera जैसी ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है। इस डील से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले लगभग आधे ऑटो पार्ट्स को टैरिफ-रेट कोटा का फायदा मिलेगा और संभवतः ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस भी मिल सकता है। पहले ऑटो पार्ट्स पर 50% तक के हाई टैरिफ लगते थे, जिससे एक्सपोर्टर्स को काफी परेशानी होती थी। इंडस्ट्री का मानना है कि यह डील एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मज़बूत करने में मदद करेगी। हालांकि, सेक्शन 232 टैरिफ और रेसिप्रोकल रेट्स पर अभी स्पष्टता का इंतज़ार है। यह डेवलपमेंट चीन से सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करने के ग्लोबल ट्रेंड के साथ भी जुड़ा है, जिससे भारत एक पसंदीदा विकल्प के तौर पर उभर रहा है।
वैल्यूएशन पर सवाल और साथियों से तुलना
अपने मजबूत ग्रोथ और सकारात्मक आउटलुक के बावजूद, Sansera Engineering का वैल्यूएशन बाज़ार में प्रीमियम है। कंपनी का पिछले 12 महीनों का प्राइस-टु-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो लगभग 45.98x से 49.0x के बीच है, जो ऑटो एंसिलरी सेक्टर के औसत 31x से 35.40x से काफी ज़्यादा है। भले ही पिछले एक साल में स्टॉक ने 56% से ज़्यादा का रिटर्न दिया है, जो बाज़ार और इंडस्ट्री के साथियों से बेहतर है, लेकिन इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 10-12% के आसपास है, जो कुछ कॉम्पिटिटर्स जैसे Gabriel India ( 19.71%) और Shriram Pistons ( 19.01%) से काफी कम है। यह प्रीमियम वैल्यूएशन इस बात का संकेत देता है कि बाज़ार कंपनी से बहुत ज़्यादा ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, स्टॉक का 12 महीने का टारगेट प्राइस ₹1,753.50 से ₹1,827.20 के बीच है, जो मौजूदा ट्रेडिंग स्तरों (₹1,849-₹1,911) से थोड़ा कम है।
भविष्य की ग्रोथ और जोखिम
Sansera Engineering का ध्यान एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर (ADS) जैसे हाई-ग्रोथ एरियाज़ पर है, जिनसे FY26 में ₹320 करोड़ का रेवेन्यू आने का अनुमान है। साथ ही, कंपनी EV-कम्पेटिबल कंपोनेंट्स में भी निवेश कर रही है, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम हैं। कंपनी पर कोई बड़ा कर्ज नहीं है, जो इसे वित्तीय रूप से मज़बूत स्थिति में रखता है। हालांकि, निरंतर ग्रोथ के लिए कंपनी को अपने ऑर्डर बुक को कुशलता से पूरा करना होगा, कच्चे माल की कीमतों से मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को मैनेज करना होगा और बदलते ऑटोमोटिव परिदृश्य में बने रहना होगा। विश्लेषक 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, लेकिन बढ़े हुए वैल्यूएशन को देखते हुए मैनेजमेंट के एग्जीक्यूशन और कॉम्पिटिटिव पोज़िशन पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत होगी।