SIAM ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया है कि माल ढुलाई के लिए रेलवे का बढ़ता उपयोग ट्रक सेल्स को नुकसान पहुंचाएगा। अगस्त में कमर्शियल वाहनों की बिक्री में **14.45%** का उछाल यह साबित करता है कि लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए सड़क मार्ग अभी भी अनिवार्य है।
क्या वाकई कम हो रही है ट्रक की मांग?
इंडस्ट्री के दिग्गज मानते हैं कि रेल नेटवर्क और सड़क परिवहन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि आधुनिक सप्लाई चेन के दो महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यह भरोसा तब आया है जब लॉजिस्टिक्स सेक्टर अधिक कुशलता और कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ताजा आंकड़े भी यही गवाही दे रहे हैं कि रोड ट्रांसपोर्ट की मांग अभी भी बरकरार है। अगस्त 2026 में कमर्शियल वाहनों की रिटेल बिक्री 90,769 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 14.45% अधिक है। विशेष रूप से हैवी कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 14% की वृद्धि देखी गई है।
ऑटो कंपनियों की नई रणनीति
Maruti Suzuki जैसी बड़ी कंपनियां अपने माल को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए अब रेलवे का भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं। कंपनी का रेल-आधारित डिस्पैच शेयर 2014-15 के फाइनेंशियल ईयर में सिर्फ 5% था, जो 2025-26 में बढ़कर 26.5% हो गया है। कंपनी ने 2031 तक इसे 35% तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी ने ग्रीन लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर में ₹1,372 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। यह बदलाव सरकार के PM GatiShakti National Master Plan के तहत हो रहा है, जिसका मकसद लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
लॉन्ग-हौल ऑपरेटरों के लिए चुनौतियां
भले ही कुल ट्रकों की वॉल्यूम में कोई कमी न आए, लेकिन काम करने का तरीका जरूर बदलेगा। लॉन्ग-हौल (लंबी दूरी) के फ्लीट ऑपरेटरों के लिए चुनौती बढ़ सकती है क्योंकि रेल नेटवर्क अधिक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साबित हो रहा है। अगर आप इस सेक्टर में निवेशित हैं, तो यह देखना होगा कि कैसे कंपनियां खुद को 'लास्ट-माइल' और 'शॉर्ट-हौल' सेगमेंट में ढालती हैं। इसके अलावा, भारत का Net Zero 2070 का लक्ष्य पुराने डीजल ट्रकों पर नियामक दबाव बढ़ा सकता है, जिससे फ्लीट मालिकों की लागत बढ़ने की संभावना है।
