ग्रामीण मांग बनी ग्रोथ की चाबी
जहां शहरी बाजारों में मांग 2.75% की मामूली रफ्तार से बढ़ी, वहीं ग्रामीण इलाकों ने कमाल कर दिया। जनवरी 2026 में ग्रामीण भारत में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 14.43% की जोरदार रफ्तार से बढ़ी, जो शहरी मांग से कहीं ज़्यादा है। हालांकि, अभी भी कुल बिक्री में शहरी इलाकों का हिस्सा 59.2% है, लेकिन गांवों की बढ़ती रफ्तार साफ इशारा कर रही है कि अब असली डिमांड का पावरहाउस गैर-मेट्रो शहरों में शिफ्ट हो रहा है। पिछले एक दशक से ज़्यादा समय से ग्रामीण मांग शहरी मांग को लगातार पीछे छोड़ रही है। इसकी कई वजहें हैं - किसानों की अच्छी फसल, शादियों का सीजन, GST (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) में हुए बदलाव और सरकारी नीतियां, जिनकी वजह से गाड़ियां खरीदना अब ज़्यादा किफायती हो गया है।
कंपनियों की नई रणनीति: गांवों पर फोकस
बड़ी ऑटो कंपनियों ने भी इस ट्रेंड को भुनाने के लिए अपनी रणनीति बदली है। Maruti Suzuki India ने अपनी लीड बरकरार रखी और करीब 42% मार्केट शेयर पर कब्ज़ा किया, 2,16,043 यूनिट्स बेचीं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में उनका फैला हुआ सेल्स और सर्विस नेटवर्क ग्रामीण इलाकों में उन्हें बड़ी बढ़त दे रहा है।
Hyundai Motor India ने इतिहास रचते हुए 59,107 यूनिट्स बेचकर अपनी सबसे ज़्यादा मंथली डोमेस्टिक सेल्स दर्ज की, जो पिछले साल से 9.5% ज़्यादा है। Venue और Aura जैसे मॉडल्स ने खूब धूम मचाई।
Tata Motors 65,558 यूनिट्स की बिक्री के साथ दूसरे नंबर पर रही, जो 12.38% मार्केट शेयर है। कंपनी 'अनुभव' जैसे मोबाइल शोरूम प्रोग्राम चला रही है ताकि कार खरीदने का अनुभव सीधे गांव-गांव तक पहुंचे। यह जानना ज़रूरी है कि भारत में कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का करीब 40% हिस्सा ग्रामीण इलाकों से आता है।
Mahindra & Mahindra (M&M) ने 63,366 यूनिट्स बेचकर 12.34% का शेयर हासिल किया। M&M की ग्रामीण रणनीति ट्रैक्टर डिवीजन के दम पर काफी मज़बूत है, जिसमें अच्छी आफ्टर-सेल्स सर्विस, आसान फाइनेंस और ग्रामीण सड़कों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए प्रोडक्ट्स पर ज़ोर है।
कुल मिलाकर, सभी सेगमेंट को मिलाकर ऑटोमोबाइल रिटेल बिक्री 17.61% बढ़कर 27.2 लाख यूनिट्स हो गई, जिसमें टू-व्हीलर्स की मांग भी गांवों से खूब बढ़ी है।
इन्वेंटरी और वैल्यूएशन का हाल
इन्वेंटरी (गाड़ियों का स्टॉक) की बात करें तो जनवरी में यह घटकर 32-34 दिनों पर आ गई है, जो सप्लाई और डिमांड के बीच अच्छे संतुलन का संकेत है।
वैल्यूएशन मेट्रिक्स पर नज़र डालें तो Maruti Suzuki का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेश्यो लगभग 30.52-32.27 के आसपास है। Tata Motors का P/E 29.55-61.61 के बीच है, जो इसके अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट्स और ट्रांसफॉर्मेशन के कारण काफी बड़ा रेंज दिखा रहा है। वहीं, Mahindra & Mahindra का P/E करीब 26.1-32.21 के स्तर पर है। ये आंकड़े भविष्य की कमाई को लेकर निवेशकों की अलग-अलग उम्मीदों को दर्शाते हैं।
आगे क्या? उम्मीदें और चुनौतियां
FADA (फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन) का अनुमान है कि फरवरी-मार्च का महीना पैसेंजर व्हीकल्स के लिए मजबूत रहेगा, क्योंकि बुकिंग अच्छी है, नए मॉडल्स लॉन्च हो रहे हैं और साल के अंत में होने वाली खरीदारी का भी जोर रहेगा।
कई ब्रोकरेज फर्म जैसे Jefferies और Nuvama का मानना है कि FY26 में ऑटो सेक्टर की ग्रोथ 10% से ज़्यादा रह सकती है। यह ग्रोथ लगातार बनी रहने वाली डोमेस्टिक मांग, ग्रामीण इलाकों की रिकवरी और सरकारी नीतियों के सपोर्ट से आएगी।
लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं जिन पर नज़र रखनी होगी। जैसे कि चुनाव से जुड़ी अनिश्चितताएं, कुछ मॉडलों की सप्लाई में दिक्कतें, बढ़ती लागतें और नए रेगुलेशंस (जैसे CAFE नॉर्म्स) से कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है। इन सबका असर एंट्री-लेवल गाड़ियों की कीमतों पर पड़ सकता है, जो कि ग्रामीण मांग का एक बड़ा हिस्सा हैं।
इसके अलावा, ग्रामीण आय का मॉनसून और एग्रीकल्चरल आउटपुट पर निर्भर रहना सेक्टर के लिए साइक्लिकल रिस्क पैदा करता है। मौजूदा P/E मल्टीपल्स, खासकर Maruti Suzuki और M&M के लिए, यह दिखाते हैं कि बाजार ने पहले से ही काफी ग्रोथ को प्राइस-इन कर लिया है। ऐसे में, अगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती है या मुकाबला और बढ़ता है, तो निवेशकों का सेंटिमेंट बदल सकता है।