Rolls-Royce ने भारत में लगातार चार साल से डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे युवा खरीदार और Spectre जैसे इलेक्ट्रिक मॉडल्स की बढ़ती मांग है। भारत अब कंपनी के लिए एशिया-पैसिफिक क्षेत्र का सबसे तेजी से उभरता बाजार बन गया है।
भारत के लग्जरी ऑटोमोबाइल मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Rolls-Royce Motor Cars के लिए भारत में लगातार 4 सालों से डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि अब पारंपरिक खरीदारों की जगह युवा उद्यमी और बिजनेस हीर्स ने ले ली है। ग्लोबल स्तर पर भी कंपनी के ग्राहकों की औसत उम्र अब 40 के दशक की शुरुआत में आ गई है, जिसका सीधा असर भारत में भी दिख रहा है।
क्यों बढ़ रही है मांग?
कंपनी का पूरा फोकस वॉल्यूम के बजाय 'एक्सक्लूसिविटी' पर है। ग्राहक अब अपनी कार को कस्टमाइज करने यानी 'बीस्पोक' (bespoke) मॉडल्स पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। अनोखे इंटीरियर ट्रिम्स और कस्टमाइज्ड कलर फिनिश की बढ़ती मांग युवाओं को खूब आकर्षित कर रही है। वहीं, कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक कार Spectre कूपे ने सेल्स में बड़ा योगदान दिया है। इसकी साइलेंट राइड और इंस्टेंट टॉर्क इसे मॉडर्न लग्जरी का नया मानक बना रहे हैं।
बड़े आंकड़े और इंतजार का समय
भारत में Rolls-Royce की गाड़ियों की शुरुआती कीमत ₹7 करोड़ के आसपास है। हालांकि, कस्टमाइजेशन के साथ यह कीमत तेजी से बढ़ती है। कंपनी की सप्लाई चेन का आलम यह है कि सामान्य ऑर्डर के लिए भी यूके (UK) से मैन्युफैक्चरिंग होकर आने में कम से कम 14 महीने का वक्त लगता है। वहीं, अगर ऑर्डर बहुत ज्यादा जटिल और कस्टमाइज्ड है, तो डिलीवरी मिलने में 3 साल तक का समय लग सकता है।
फिलहाल कंपनी दिल्ली और चेन्नई में रिटेल हब चला रही है, जबकि मुंबई और हैदराबाद में टेक्निकल सपोर्ट उपलब्ध है। भविष्य के लिहाज से देखें तो हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स की बढ़ती संख्या और लग्जरी सेगमेंट का बढ़ता दायरा इस ग्रोथ को आगे भी बनाए रखने की उम्मीद जगाता है। हालांकि, भारत में लग्जरी गाड़ियों पर लगने वाली ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी और आर्थिक चक्र में होने वाले बदलाव इस सेक्टर के लिए प्रमुख चुनौतियां बने हुए हैं।
