Renault India ने देश को कंपनी के टॉप 3 ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर्स में से एक बनाने की कमर कस ली है। 2030 तक 2 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी 7 नए मॉडल लॉन्च करेगी, जिसमें एक मास-मार्केट इलेक्ट्रिक व्हीकल भी शामिल होगा। साथ ही, चेन्नई प्लांट पर पूरा कंट्रोल लेकर घरेलू बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
नई रणनीति 'फ्यूचररेडी इंडिया'
Renault India के CEO Stéphane Deblaise की अगुवाई में कंपनी ने एक महत्वाकांक्षी ट्रांसफॉर्मेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत, भारत को कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग ऑपरेशंस का एक मुख्य ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य है। यूनियन कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर Piyush Goyal के साथ बातचीत के बाद, कंपनी ने 2030 तक भारत से 2 अरब डॉलर के एक्सपोर्ट का टारगेट रखा है। यह कदम कंपनी के लिए बड़ा स्ट्रेटेजिक बदलाव है, क्योंकि अब तक वह भारतीय बाजार में छोटे पैसेंजर व्हीकल्स पर ही निर्भर रही है।
7 नए मॉडल और EV पर फोकस
'FutuReady India' नाम का यह रोडमैप 2030 तक 7 नए मॉडल और 22 वैरिएंट्स पेश करने की योजना पर आधारित है। इस लाइनअप में Duster SUV की वापसी, नए SUV मॉडल्स और सबसे महत्वपूर्ण, कंपनी की पहली लोकल मास-मार्केट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) शामिल है। Renault का लक्ष्य भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में 5% हिस्सेदारी हासिल करना है, जो कि मौजूदा स्थिति से काफी ज्यादा है। फिलहाल, पुराने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के कारण कंपनी की मार्केट शेयर 1% से भी कम रही है।
चेन्नई प्लांट पर पूरा कंट्रोल
इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, Renault डुअल-प्लेटफॉर्म स्ट्रेटेजी अपनाएगी। Renault Group एंट्री प्लेटफॉर्म Kwid, Kiger और Triber जैसे मॉडल्स को सपोर्ट करेगा, जबकि ज्यादा फ्लेक्सिबल Renault Group मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नए SUVs डेवलप करने के लिए किया जाएगा। यह मॉड्यूलर अप्रोच एक ही प्रोडक्शन लाइन पर इंटरनल-कम्बशन, हाइब्रिड और बैटरी-इलेक्ट्रिक इंजन को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट कम होगी और कंज्यूमर प्रेफरेंस के अनुसार तेजी से बदलाव किए जा सकेंगे।
इस नई स्ट्रेटेजी को संभव बनाने में Renault का एक अहम कदम यह है कि उसने हाल ही में अपने चेन्नई मैन्युफैक्चरिंग जॉइंट वेंचर का पूरा मालिकाना हक ले लिया है। कंपनी ने Nissan की 51% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस ओनरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव से Renault को इंडिपेंडेंट इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने और सप्लाई चेन को स्ट्रीमलाइन करने में ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी, जो एक्सपोर्ट कैपेबिलिटीज को बढ़ाने और लोकलाइजेशन लेवल्स को सुधारने के लिए जरूरी है।
आगे की राह और चुनौतियां
इस स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कितने अच्छे से भारतीय SUV सेगमेंट में मुकाबला कर पाती है, जहां अभी Maruti Suzuki, Hyundai और Tata Motors जैसी कंपनियां हावी हैं। हाई-वैल्यू SUVs और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की ओर बढ़ना सेक्टर के मौजूदा ट्रेंड्स के अनुरूप है, लेकिन कंपनी के सामने अपनी ब्रांड प्रेजेंस और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को फिर से बनाने की चुनौती होगी। इन्वेस्टर्स कंपनी के प्रोडक्ट लॉन्च को लागू करने, चेन्नई फैसिलिटी के यूटिलाइजेशन लेवल्स और हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ते हुए कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग बनाए रखने की क्षमता पर बारीकी से नजर रखेंगे।
