इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बनाने वाली स्टार्टअप Raptee.HV ने इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक अपनी मासिक प्रोडक्शन कैपेसिटी को **1,500** यूनिट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, कंपनी भारत के पांच बड़े शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाने की तैयारी में है।
Raptee.HV की विस्तार योजना
चेन्नई की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल निर्माता Raptee.HV अपनी मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल मौजूदगी को बढ़ा रही है। कंपनी ने भारत के पांच नए शहरों - कोच्चि, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में अपनी रिटेल पहुंच का विस्तार करने की योजना बनाई है। हाल ही में कंपनी ने तमिलनाडु के बाहर बेंगलुरु में अपना पहला एक्सपीरियंस सेंटर खोला था।
प्रोडक्शन कैपेसिटी और समय-सीमा
इस विस्तार योजना को समर्थन देने के लिए, कंपनी अपने चेन्नई स्थित प्लांट में प्रोडक्शन बढ़ा रही है। Raptee.HV का लक्ष्य सितंबर तक 100 मोटरसाइकिल प्रति माह का प्रोडक्शन लेवल हासिल करना है, जिसे दिसंबर तक 300 यूनिट प्रति माह तक बढ़ाया जाएगा। चालू फाइनेंशियल ईयर के अंत तक, स्टार्टअप का लक्ष्य कुल 1,500 मोटरसाइकिल प्रति माह का प्रोडक्शन करना है। चेन्नई में मौजूद 5 एकड़ के प्लांट की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 1,500 यूनिट प्रति माह है। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी ने चेन्नई के पास 40 एकड़ की जमीन भी अधिग्रहित की है।
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट पर फोकस
जहां भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में काफी तेजी देखी गई है, वहीं इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ अभी भी लगभग 0.1% है (सालाना 13 मिलियन मोटरसाइकिल बिकती हैं)। Raptee.HV, जो 2019 में स्थापित हुई थी, अपनी फ्लैगशिप T30 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल (कीमत ₹2.39 लाख) के साथ इस खास सेगमेंट पर कब्जा करना चाहती है। यह व्हीकल 240V हाई-वोल्टेज आर्किटेक्चर का उपयोग करती है, जो इसे इंडस्ट्री में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले लो-वोल्टेज प्लेटफॉर्म से अलग बनाता है।
एग्जीक्यूशन और प्रतिस्पर्धा
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि अब उनका ध्यान ब्रांड विजिबिलिटी और रिटेल प्रेजेंस बढ़ाने पर है। हालांकि, कंपनी के पास अगले 6 महीनों की बुकिंग है, लेकिन एक स्टार्टअप से बड़े निर्माता बनने की राह में एग्जीक्यूशन रिस्क है। यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रोडक्शन टारगेट पूरे हों और राष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों को सर्विस दी जा सके। इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। निवेशकों को प्रोडक्शन रैंप-अप की गति, T30 मॉडल की डिलीवरी टाइमलाइन और राष्ट्रीय रिटेल विस्तार पर होने वाले खर्च के बीच मार्जिन स्ट्रक्चर को बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर नजर रखनी होगी।
