प्रोडक्शन कैपेसिटी में भारी इजाफा
Raptee तमिलनाडु के चेय्यर के पास 40 एकड़ जमीन पर एक नया ग्रीनफील्ड प्लांट स्थापित करने जा रही है। इस प्लांट की मदद से कंपनी अगले 8 सालों में 750,000 इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल बनाने की क्षमता हासिल करना चाहती है। यह कंपनी के मौजूदा पायलट फैसिलिटी से काफी बड़ा कदम है, जिसकी क्षमता लगभग 1,500 मोटरसाइकिल प्रति माह है, जिसे अतिरिक्त मशीनरी के साथ 9,000 यूनिट तक बढ़ाया जा सकता है। यह बड़ा विस्तार अगले 18 से 24 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है, जबकि मौजूदा चेन्नई फैसिलिटी कंपनी का हेडक्वार्टर और R&D हब बनी रहेगी।
फंडिंग की जरूरत पर जोर
इस बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए Raptee को भारी मात्रा में फंड की जरूरत होगी। अब तक कंपनी ने विभिन्न फंडिंग राउंड्स में लगभग $12.8 मिलियन से लेकर $29.5 मिलियन (करीब ₹105 करोड़ से ₹245 करोड़) जुटाए हैं, जिसमें हाल ही में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड से मिला ग्रांट भी शामिल है। लेकिन 750,000 यूनिट्स की क्षमता तक पहुंचने के लिए और भी बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट की दरकार होगी, जो कंपनी के लिए एक बड़ी फंडिंग चुनौती पेश करता है।
इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट को टारगेट
Raptee जानबूझकर इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट पर फोकस कर रही है, जो भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स की तुलना में कम संतृप्त (saturated) है। कंपनी का लक्ष्य ऐसे परफॉरमेंस-ओरिएंटेड इलेक्ट्रिक बाइक्स पेश करना है जो बाजार में मौजूद ज्यादातर स्कूटर-आधारित EV मॉडलों से अलग हों। 2025 में, भारतीय इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में 1.28 मिलियन यूनिट्स की बिक्री हुई, जिसमें 11% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई और कुल EV मार्केट का 56% हिस्सा रहा। इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल इस बड़े बाजार का एक छोटा हिस्सा हैं, जो Raptee के लिए अवसर और चुनौती दोनों प्रस्तुत करता है।
खास टेक्नोलॉजी और वारंटी
Raptee की सबसे बड़ी खासियत उसकी अपनी हाई-वोल्टेज पावरट्रेन टेक्नोलॉजी है, जिसे खास तौर पर मोटरसाइकिलों के लिए डिजाइन किया गया है और यह इलेक्ट्रिक कार टेक्नोलॉजी से प्रेरित है। यह कई इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के लो-वोल्टेज सिस्टम से अलग है। कंपनी ने अपनी बाइक्स में कंबाइंड चार्जिंग सिस्टम (CCS) भी दिया है, जो इलेक्ट्रिक कारों के लिए बने पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कम्पेटिबल है। इससे लगभग 20 मिनट में 100 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज जोड़ी जा सकती है। इसके अलावा, Raptee आठ साल की बैटरी वारंटी दे रही है, जो इंडस्ट्री में आमतौर पर मिलने वाली तीन साल की वारंटी से काफी ज्यादा है। यह टेक्नोलॉजी छह साल के रिसर्च और डेवलपमेंट का नतीजा है।
कॉम्पिटिशन और आगे की राह
Raptee एक कॉम्पिटिटिव भारतीय EV बाजार में कदम रख रही है। Ola Electric जैसी कंपनियां, जिनकी 2 मिलियन यूनिट्स प्रति वर्ष की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी है, और Ather Energy जैसी बड़ी कंपनियां पहले से ही मौजूद हैं। Revolt Motors भी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में विस्तार कर रही है। Raptee का 750,000 यूनिट्स का टारगेट इन दिग्गजों के मुकाबले काफी महत्वाकांक्षी है। कंपनी को अपने विस्तार के लिए भारी पूंजी जुटाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और तेजी से मार्केट शेयर हासिल करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
