Ramkrishna Forgings ने अब कमर्शियल व्हीकल पर निर्भरता कम करने का फैसला किया है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक **₹10,000 करोड़** का रेवेन्यू हासिल करना है, जिसके लिए वे पैसेंजर व्हीकल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रेलवे सेक्टर में बड़ा दांव लगा रहे हैं।
बड़े बदलाव की तैयारी
कंपनी अब अपनी पहचान सिर्फ कमर्शियल व्हीकल (CV) सप्लायर के तौर पर नहीं रखना चाहती। इस बड़े लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी पैसेंजर गाड़ियों के पुर्जों जैसे ट्रांसमिशन गियर्स और पिनियंस के बाजार में उतर रही है। इस विस्तार के लिए मैनेजमेंट ने ₹170 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना बनाई है। हालांकि, इन नए और प्रतिस्पर्धी बाजारों में अपनी जगह बनाना कंपनी के लिए एक चुनौती होगी, जहाँ मार्जिन बनाए रखना सबसे जरूरी है।
एक्सपोर्ट और रेलवे पर नजर
कंपनी के ग्रोथ प्लान में इंटरनेशनल मार्केट्स का बड़ा योगदान है। वर्तमान में 30% रहने वाली एक्सपोर्ट हिस्सेदारी को 40% तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मैक्सिको में नया प्लांट नॉर्थ अमेरिका के क्लाइंट्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। वहीं, रेलवे वर्टिकल 30% की सालाना दर से बढ़ रहा है और कंपनी अब बेसिक फॉरजिंग से आगे बढ़कर जटिल असेंबली और व्हील्स के निर्माण पर ध्यान दे रही है।
नई टेक्नोलॉजी में निवेश
कंपनी EV सेगमेंट में भी अपने पावरट्रेन और एक्सल पोर्टफोलियो का लाभ उठाने की कोशिश में है। इसके अलावा, एरोस्पेस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग जैसे हाई-बैरियर सेक्टर में भी कदम रखे जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में मार्जिन तो ज्यादा है, लेकिन इसमें तकनीक और समय दोनों की जरूरत है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनी इस बड़े बदलाव के दौरान अपने कर्ज और मुनाफे के स्तर को कैसे संतुलित रखती है।
