Pricol Limited अपने इलेक्ट्रॉनिक्स-केंद्रित बिजनेस, जिसे ड्राइवर इन्फॉर्मेशन एंड कनेक्टेड व्हीकल सॉल्यूशंस (DICVS) के नाम से जाना जाता है, को एक अलग लिस्टेड कंपनी 'Pricol Autotech Limited' में डीमर्ज (Demerge) करने जा रही है। इस कदम का मकसद हाई-ग्रोथ वाले इस इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट को मैकेनिकल प्रोडक्ट्स सेगमेंट से अलग कर स्वतंत्र वैल्यूएशन देना है।
Pricol Limited ने एक बड़ी पुनर्गठन योजना का ऐलान किया है। कंपनी अपने इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस, जिसे ड्राइवर इन्फॉर्मेशन एंड कनेक्टेड व्हीकल सॉल्यूशंस (DICVS) कहा जाता है, को एक नई कंपनी 'Pricol Autotech Limited' में डीमर्ज करेगी। यह DICVS डिवीजन डिजिटल कॉकपिट, इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और टेलीमैटिक्स जैसे प्रोडक्ट्स बनाती है।
बिजनेस का बंटवारा
वित्तीय वर्ष 2026 में, DICVS डिवीजन ने Pricol के कुल रेवेन्यू में लगभग ₹2,424.63 करोड़ का योगदान दिया था। यह कंपनी के कुल बिजनेस वॉल्यूम का 61% से अधिक है। डीमर्जर के बाद, Pricol Limited का बचा हुआ हिस्सा मैकेनिकल कंपोनेंट्स पर फोकस करेगा। इसमें पंप और डिस्क ब्रेक जैसे एक्चुएशन, कंट्रोल और फ्लूइड मैनेजमेंट सिस्टम्स शामिल होंगे। साथ ही, हाल ही में अधिग्रहित सब्सिडियरी Precision Products (P3L) के पॉलीमर कंपोनेंट्स का बिजनेस भी इसी में रहेगा। जहां एक तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स यूनिट इनोवेशन और सॉफ्टवेयर-आधारित ग्रोथ पर ध्यान देगी, वहीं मैकेनिकल सेगमेंट मैन्युफैक्चरिंग स्केल और लागत-दक्षता पर जोर देगा।
शेयरधारकों को क्या मिलेगा?
इस पुनर्गठन योजना के तहत, Pricol Limited के मौजूदा शेयरधारकों को नई कंपनी Pricol Autotech Limited के एक शेयर के बदले एक शेयर दिया जाएगा। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि नई कंपनी में शेयरधारिता पैटर्न वही रहेगा जो पैरेंट कंपनी में है, यानी मालिकाना हक में कोई तत्काल कमी नहीं आएगी। दोनों कंपनियों को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट करने की योजना है।
क्यों किया जा रहा है ये डीमर्जर?
कंपनियां अक्सर ऐसे कदम उठाती हैं ताकि अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स, जिनकी जरूरतें और ग्रोथ की संभावनाएं भिन्न होती हैं, उन्हें स्वतंत्र रूप से विकसित होने का मौका मिल सके। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में, अक्सर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस को पारंपरिक मैकेनिकल मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में अधिक ग्रोथ पोटेंशियल वाला माना जाता है। इस डीमर्जर से बाजार प्रत्येक बिजनेस को उसकी विशिष्ट ग्रोथ प्रोफाइल और वित्तीय जरूरतों के आधार पर अलग वैल्यूएशन दे सकेगा।
आगे की राह
इस डीमर्जर प्रक्रिया को पूरा होने में समय लगेगा। मैनेजमेंट का अनुमान है कि इसमें 15 से 18 महीने लग सकते हैं। इसलिए, नई कंपनी के 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में लिस्ट होने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया रेगुलेटरी अप्रूवल, एक्सचेंज क्लीयरेंस, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंजूरी और शेयरधारकों की वोटिंग पर निर्भर करेगी।
