केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal का मानना है कि यूरोप में बढ़ते रेगुलेटरी बोझ के कारण यूरोपीय कार कंपनियां भारत का रुख कर सकती हैं। सरकार का लक्ष्य **$1 ट्रिलियन** का सालाना एक्सपोर्ट हासिल करना है, हालांकि अभी इम्पोर्ट की रफ्तार एक्सपोर्ट से थोड़ी ज्यादा है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने 'द दिल्ली डायलॉग' में भारत को ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने का रोडमैप पेश किया है। मंत्री के मुताबिक, यूरोप में औद्योगिक नियमों की सख्ती के कारण वहां की कंपनियों की कॉम्पिटिटिवनेस घट रही है, जिसका सीधा फायदा भारत जैसे देशों को मिल सकता है।
Tata Motors का उदाहरण
मंत्री ने Tata Motors और Jaguar के एकीकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को भारत लाने और री-इंजीनियरिंग करने से कंपनी ने न केवल घाटे से उबरकर प्रॉफिट हासिल किया, बल्कि अपनी ग्लोबल साख भी मजबूत की।
ट्रेड डेटा और चुनौतियां
सरकार का विजन $1 ट्रिलियन के सालाना एक्सपोर्ट का है। हालिया आंकड़ों (अप्रैल-अगस्त 2026) पर नजर डालें, तो भारत का एक्सपोर्ट 17.85% बढ़कर $215.91 बिलियन रहा है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि इसी दौरान इम्पोर्ट में 18.21% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो ट्रेड बैलेंस पर दबाव डाल रही है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
निवेशकों को यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism जैसे नियमों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यह भारतीय निर्माताओं की कॉस्टिंग को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, UK और EU के साथ जारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत और वैश्विक अनिश्चितताएं मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट की गति को तय करेंगी।
