अगस्त 2026 में पेट्रोल कारों की रिटेल बिक्री गिरकर **40.85%** पर आ गई है, जो पिछले साल **46.37%** थी। वहीं, CNG, हाइब्रिड और EV जैसी वैकल्पिक फ्यूल वाली गाड़ियों का मार्केट शेयर बढ़कर **41.95%** हो गया है, जिससे ऑटो सेक्टर में बड़ा बदलाव दिख रहा है।
भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल और इथेनॉल-ब्लेंड गाड़ियों की हिस्सेदारी घटकर 40.85% रह गई है, जबकि वैकल्पिक फ्यूल (CNG, हाइब्रिड और EV) ने 41.95% मार्केट पर कब्जा कर लिया है।\n\n### CNG की बढ़ती लोकप्रियता\nइस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह रनिंग कॉस्ट को कम करना है। CNG अब बजट के प्रति जागरूक ग्राहकों की पहली पसंद बन गई है, जिसका मार्केट शेयर बढ़कर 25.28% हो गया है, जो पिछले साल 21.47% था। फैक्टरी-फिटेड CNG टेक्नोलॉजी में सुधार ने भी इसकी डिमांड को रफ्तार दी है।\n\n### लीडरबोर्ड पर कंपनियों का हाल\nCNG सेगमेंट में Maruti Suzuki का दबदबा बरकरार है, जिसका मार्केट शेयर करीब 71% है। वहीं, Tata Motors CNG सेगमेंट में 17% हिस्सेदारी रखती है और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में 43% शेयर के साथ लीडर बनी हुई है। इसके अलावा, Hyundai की CNG सेगमेंट में 9% की हिस्सेदारी है।\n\n### निवेशकों के लिए चुनौतियां\nकंपनियों के सामने अब चुनौती अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने की है। CNG और हाइब्रिड गाड़ियों के प्रोडक्शन और कीमत का गणित पेट्रोल कारों से अलग है। इसके साथ ही, E20 फ्यूल (20% इथेनॉल मिश्रण) को लेकर ग्राहकों की उलझन भी चिंता का विषय बनी हुई है। शेयरधारकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के रॉ मटेरियल कॉस्ट और वैकल्पिक फ्यूल पोर्टफोलियो के विस्तार पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि वे अपने मार्जिन को कैसे प्रोटेक्ट करती हैं।
