इलेक्ट्रिक बस मार्केट में बूम, भविष्य क्या?
भारत में इलेक्ट्रिक बसों का बाजार तेजी से फल-फूल रहा है। यह देश को ग्रीन ट्रांसपोर्ट की ओर ले जाने का एक अहम हिस्सा है। अनुमान है कि यह मार्केट 2026 में $1.41 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $2.4 से $2.9 बिलियन के बीच पहुंच जाएगा, जो हर साल करीब 14-20% की रफ्तार से बढ़ेगा। FY26 तक, कुल बस बिक्री में इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी लगभग 4.5% हो चुकी है, जो डीजल इंजन से एक बड़ा बदलाव दिखाती है। सरकार की FAME II और PM e-Bus Sewa जैसी योजनाओं से इसे और बढ़ावा मिल रहा है। लंबी अवधि में, इलेक्ट्रिक बसों की लागत डीजल बसों से कम बैठती है। माना जा रहा है कि FY26 के अंत तक पूरा बस मार्केट कोविड से पहले के बिक्री स्तर को पार कर जाएगा, जबकि FY28 तक इलेक्ट्रिक बसों की हिस्सेदारी 13% तक पहुंचने की उम्मीद है।
Olectra Greentech: ऑर्डर बढ़े, पर प्रॉफिट पर दबाव?
Olectra Greentech, जो भारत में EV बसों की एक प्रमुख निर्माता है, इस बढ़ती मांग का फायदा उठा रही है। कंपनी को हाल ही में तेलंगाना से ₹1,800 करोड़ के 1,085 इलेक्ट्रिक बसों के बड़े ऑर्डर मिले हैं, साथ ही हिमाचल प्रदेश से ₹497 करोड़ के 297 बसों के ऑर्डर भी मिले हैं। Olectra अपनी उत्पादन क्षमता भी बढ़ा रही है। हालांकि, इतने सारे ऑर्डर मिलने से कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है। Q3 FY26 में, कंपनी का रेवेन्यू ₹115 करोड़ बढ़कर ₹664 करोड़ हो गया, लेकिन नेट प्रॉफिट ₹47 करोड़ पर ही ठहरा रहा। इसकी वजह बैटरी और दूसरे पार्ट्स की बढ़ती लागत के साथ-साथ बड़े ऑर्डर के प्रोडक्शन और स्केल-अप का खर्च है। कंपनी का वैल्यूएशन (P/E रेश्यो 50x से 70x के बीच) बाजार की ऊंची उम्मीदों को दिखाता है, लेकिन प्रॉफिट इन उम्मीदों के मुताबिक नहीं बढ़ पा रहा। तकनीकी दिक्कतों के चलते कुछ एनालिस्टों ने भले ही रेटिंग घटाई हो, लेकिन EV पर Olectra का पूरा फोकस और बड़ा ऑर्डर बुक इसे हाई-ग्रोथ के लिए तैयार करता है, हालांकि इसमें जोखिम भी ज्यादा है।
Ashok Leyland: EV में स्टेबल ग्रोथ
वहीं, Ashok Leyland, जो कमर्शियल वाहनों की एक जानी-मानी कंपनी है, EV मार्केट में एक संतुलित रणनीति अपना रही है। अपनी सब्सिडियरी Switch Mobility और OHM Global Mobility के जरिए, कंपनी ने अच्छी प्रगति की है। Switch Mobility ने FY26 में 1,466 इलेक्ट्रिक बसें बेचीं, जिससे उसे ई-बस सेक्टर में 24.8% का मार्केट शेयर मिला और उसने बाकी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। Ashok Leyland के मौजूदा कमर्शियल व्हीकल बिजनेस से मिलने वाली मजबूत फाइनेंशियल नींव इसे EV डिवीजन में निवेश करने की सहूलियत देती है, बिना कंपनी के कुल मुनाफे को जोखिम में डाले। कंपनी लखनऊ में एक नया प्लांट लगाकर EV प्रोडक्शन बढ़ा रही है, जो सालाना 2,500 बसें बनाएगा, और भविष्य में इस क्षमता को दोगुना करने की योजना है। OHM Global Mobility को यूरोप में भी ऑर्डर मिले हैं। Ashok Leyland का वैल्यूएशन (P/E रेश्यो आमतौर पर 26x से 37x के बीच) केवल EV पर फोकस करने वाली कंपनियों की तुलना में ज्यादा रियलिस्टिक लगता है। एनालिस्ट आमतौर पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं, जिनके टारगेट प्राइस ₹200-₹205 के आसपास हैं। यह कंपनी के कामकाज और ग्रोथ की संभावनाओं पर भरोसा दिखाता है, भले ही इसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 4.08 है।
कॉम्पिटिशन बढ़ा, निवेशक क्या करें?
भारत का इलेक्ट्रिक बस मार्केट और भी कॉम्पिटिटिव होता जा रहा है। Olectra और Ashok Leyland के अलावा, PMI Electro Mobility Solutions, JBM Auto, और Tata Motors जैसी कंपनियां भी मार्केट शेयर के लिए जोर-शोर से लगी हैं। FY26 में PMI Electro वॉल्यूम के हिसाब से सबसे बड़ी सेलर रही, वहीं JBM Auto ने भी रेवेन्यू ग्रोथ और प्रॉफिटेबल EV ऑपरेशंस की रिपोर्ट दी है। Tata Motors भी अपनी इलेक्ट्रिक बस फ्लीट का विस्तार कर रही है।
निवेशकों के लिए Olectra Greentech और Ashok Leyland के बीच फैसला उनके जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करेगा। Olectra अपने EV फोकस और बड़े ऑर्डरों से ज्यादा ग्रोथ दे सकती है, लेकिन इसके साथ ऊंची वैल्यूएशन, ऑर्डर पूरा करने की चुनौतियां और प्रॉफिट मार्जिन का दबाव है। Ashok Leyland एक ज्यादा स्टेबल इन्वेस्टमेंट का विकल्प है। इसका मजबूत कमर्शियल व्हीकल बिजनेस EV में सावधानीपूर्वक विस्तार का सहारा बनता है, जो मार्केट के उतार-चढ़ाव को संभालने और लंबी अवधि में लगातार ग्रोथ हासिल करने में मदद करता है, भले ही EV विस्तार उतना तेज न हो। निवेशकों को इस तेजी से बदलते बाजार में ऑर्डर की पूर्ति, प्रॉफिट मार्जिन और सरकारी सपोर्ट पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। Ashok Leyland अपने Q4 FY26 के नतीजे 25 अप्रैल, 2026 को जारी करने वाली है।