सरकार ने Ola Electric और Reliance New Energy के बैटरी प्रोजेक्ट्स के लिए PLI स्कीम के तहत डेडलाइन को बढ़ाकर 2031 कर दिया है। हालांकि, SEBI की जांच के चलते Rajesh Exports को इस एक्सटेंशन से बाहर रखा गया है।
Ola और Reliance को मिली बड़ी राहत
केंद्र सरकार ने Ola Electric और Reliance New Energy को बड़ी राहत देते हुए, उनके बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत समय-सीमा को बढ़ाकर 2031 कर दिया है। इस फैसले से दोनों कंपनियों को अपने प्रोजेक्ट टारगेट्स को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
Ola Electric के लिए यह एक्सटेंशन काफी अहम है, क्योंकि इससे उन्हें ₹7,240 करोड़ तक के इंसेंटिव मिल सकते हैं। सरकार इन फंड्स को कंपनी की प्रगति और बिक्री के आधार पर तिमाही आधार पर देगी। पहले दोनों कंपनियां निवेश के शुरुआती माइलस्टोन्स को पूरा करने में संघर्ष कर रही थीं, जो कि इंडस्ट्री की एक आम समस्या रही है। विशेष मशीनरी और कच्चे माल की सोर्सिंग में जटिलताओं के कारण ऐसा हुआ था।
Rajesh Exports को झटका, SEBI जांच के घेरे में
जहां Ola और Reliance को राहत मिली है, वहीं Rajesh Exports Ltd को झटका लगा है। सरकार ने कंपनी और उसकी सहयोगी यूनिट्स के लिए एक्सटेंशन देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के एक अंतरिम आदेश के बाद आया है। SEBI ने कंपनी के गवर्नेंस, फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू मिस-रिप्रेजेंटेशन के आरोपों पर गंभीर चिंता जताई है। फिलहाल कंपनी SEBI और मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) सहित कई रेगुलेटरी बॉडीज की जांच के दायरे में है।
सेक्टर की क्षमता निर्माण में धीमी गति
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ओवरऑल प्रगति धीमी बनी हुई है। सरकार ने स्कीम के तहत 40 GWh कैपेसिटी का आवंटन किया था, लेकिन अगस्त 2026 तक केवल 1.4 GWh कैपेसिटी ही ऑपरेशनल है। इस धीमी गति को देखते हुए, सरकार ने ग्रिड-स्केल स्टेशनरी स्टोरेज के लिए अतिरिक्त 10 GWh कैपेसिटी के लिए नए बिड्स भी मांगे हैं, जिसकी आखिरी तारीख 13 अक्टूबर, 2026 है।
निवेशकों के लिए, सिर्फ डेडलाइन एक्सटेंशन ही नहीं, बल्कि असल में काम कितनी तेजी से होता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। एक्सटेंशन कंपनियों को तुरंत पेनल्टी से बचाएगा, लेकिन Ola और Reliance के लिए असली फायदा उनकी मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं को बढ़ाने और नई समय-सीमा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। वहीं, Rajesh Exports पर रेगुलेटरी चिंता एक बड़ा रिस्क फैक्टर बनी हुई है।
