मार्जिन में उछाल, पर सेल्स में भारी गिरावट!
Ola Electric के नतीजे एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां कंपनी के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में 55% की भारी गिरावट आई है (Q3 FY25 के ₹1,045 करोड़ से गिरकर Q3 FY26 में ₹470 करोड़), वहीं उसके ग्रास मार्जिन ने 34.3% का रिकॉर्ड स्तर छुआ है। यह पिछले साल के मुकाबले 15.7 पर्सेंटेज पॉइंट का उछाल है। कंपनी ने 32,680 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 84,029 यूनिट्स था। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट लॉस ₹487 करोड़ रहा।
Ola Electric का कहना है कि यह 'स्ट्रक्चरल रीसेट' और लागत में कटौती का नतीजा है, जिससे कंपनी का EBITDA breakeven पॉइंट 15,000 यूनिट्स प्रति महीना हो गया है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप ₹13,519.00 करोड़ है।
कॉम्पिटिशन में पिछड़ती Ola Electric, Ather Energy आगे
जबकि Ola Electric बिक्री के मोर्चे पर संघर्ष कर रही है, वहीं कॉम्पिटिटर Ather Energy तेजी से आगे बढ़ रहा है। Ather Energy ने Q2 FY26 में अपनी आय 57% बढ़ाकर ₹940.7 करोड़ दर्ज की और नेशनल मार्केट शेयर 17.4% हासिल किया।
Ola Electric का मार्केट शेयर कम हुआ है, जिसने एनालिस्ट्स को चिंतित कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म Emkay Global Financial Services ने स्टॉक को 'Sell' रेटिंग दी है और इसका प्राइस टारगेट ₹50 से घटाकर ₹20 कर दिया है। उनका मानना है कि कंपनी को फ्यूचर में टिके रहने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेक्टर में TVS Motor, Bajaj Auto, और Hero MotoCorp जैसी स्थापित कंपनियां 60% मार्केट शेयर पर कब्जा जमा चुकी हैं, जिससे नए प्लेयर्स के लिए मुश्किल खड़ी हो रही है।
एनालिस्ट्स की चेतावनी और वैल्यूएशन पर सवाल
एनालिस्ट्स की राय Ola Electric के लिए ज्यादातर नकारात्मक है। Emkay Global ने 'Sell' रेटिंग के साथ लंबे समय तक मुश्किलों की चेतावनी दी है। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी का मार्केट कैप ₹13,519.00 करोड़, शेयरहोल्डर फंड्स ₹5,143.00 करोड़ (मार्च 2025 तक) से काफी ज्यादा है। यह 2.63 गुना बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है, जो नेगेटिव रिटर्न और कैश बर्न को देखते हुए महंगा माना जा रहा है।
अन्य ब्रोकरेज रिपोर्ट्स में 'Hold' रेटिंग और ₹38.13 से ₹42.50 के आसपास प्राइस टारगेट दिए गए हैं, जो ज्यादा ग्रोथ की संभावना नहीं दिखाते।
आगे क्या?
Ola Electric के सामने मार्जिन सुधार के बावजूद रेवेन्यू और बिक्री बढ़ाने की बड़ी चुनौती है। कॉम्पिटिशन में बने रहने और प्रॉफिटेबल बनने के लिए कंपनी को अपनी मार्केट पोजीशन मजबूत करनी होगी।