बिक्री में सुधार और LFP सेल टेक से शेयर में उछाल
Ola Electric Mobility Ltd. के शेयरों में गुरुवार को लगभग 20% की जबरदस्त तेजी आई, जो ₹36.34 तक पहुंच गए। यह अप्रैल महीने के लिए 25% की बढ़त है। यह उछाल पिछले छह महीनों की गिरावट के बाद आया है और इसकी मुख्य वजह मार्च की बिक्री में आया बड़ा सुधार है। फरवरी में जहां 3,973 यूनिट्स की बिक्री हुई थी, वहीं मार्च में यह आंकड़ा लगभग 10,117 यूनिट्स तक पहुंच गया। पिछले हफ्ते मार्च के आखिर में हर दिन 1,000 से ज्यादा ऑर्डर्स मिले, जो डिमांड में स्थिरीकरण का संकेत दे रहे हैं। कंपनी ने अपनी खुद की LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) बैटरी सेल टेक्नोलॉजी विकसित करने की भी घोषणा की है, जिससे लागत कम होने और EV अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मार्केट शेयर में गिरावट और प्रतिस्पर्धी दबाव
हालांकि, शेयर की इस तेजी के बावजूद, Ola Electric की मार्केट पोजीशन काफी कमजोर हुई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में, कंपनी की रिटेल बिक्री पिछले साल की तुलना में 52.28% घटकर 1,64,295 यूनिट्स रह गई। इसके कारण 2024 में 36.7% रहा मार्केट शेयर 2025 में घटकर 16.1% पर आ गया। इस दौरान, भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में 21.81% की ग्रोथ दर्ज की गई। TVS Motor Company, Bajaj Auto और Ather Energy जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वियों ने अच्छी ग्रोथ दिखाई है, और Ather Energy का मार्केट कैपिटलाइजेशन तो कई बार Ola Electric से भी ज्यादा रहा। फाइनेंशियली बात करें तो, Ola Electric ने Q3 FY26 में ₹470 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹487 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया। कंपनी की ग्रॉस मार्जिन में सुधार हुआ और यह 34.3% तक पहुंची, लेकिन बिक्री बढ़ाने के लिए ₹60,000 तक की भारी कीमत कटौती (जैसे Roadster X+ पर) करनी पड़ी।
एनालिस्ट्स की सतर्कता और निवेश जोखिम
एनालिस्ट्स Ola Electric के इन्वेस्टमेंट केस को लेकर सतर्क दिख रहे हैं। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगातार नेट लॉस और नेगेटिव प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो (P/E ratio) से दबा हुआ है, जो मौजूदा प्रॉफिटेबिलिटी पर संदेह दिखाता है। ज्यादातर एनालिस्ट्स 'Sell' रेटिंग दे रहे हैं और उनका 12 महीने का औसत प्राइस टारगेट लगभग ₹29.88 है, जो ज्यादा बड़े अपसाइड की उम्मीद नहीं दिखाता। स्थापित नेटवर्क वाले प्रतिद्वंद्वियों ने Ola Electric के मार्केट शेयर घटने के साथ फायदा उठाया है। आक्रामक डिस्काउंटिंग का मार्जिन पर पड़ने वाला लॉन्ग-टर्म असर और मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने की क्षमता पर सवाल बने हुए हैं।
भविष्य के अनुमान और प्रॉफिटेबिलिटी की उम्मीदें
आगे के अनुमानों के अनुसार, Q4 FY26 रेवेन्यू ₹1,600–2,000 करोड़ के बीच रहने की उम्मीद है। कंपनी लागत में कमी और ग्रॉस मार्जिन में सुधार के जरिए EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल करने का लक्ष्य रखती है। हालांकि, एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट ₹20.00 से ₹45.00 तक अलग-अलग हैं। कंपनी की अपनी टेक्नोलॉजी (जैसे LFP सेल) को लगातार सेल्स ग्रोथ, मार्केट शेयर बढ़ाने और प्रॉफिटेबिलिटी में बदलने की क्षमता ही FY27 में निवेशकों का विश्वास जीत पाएगी।