शेयर में जारी है गिरावट का सिलसिला
Ola Electric के शेयरों में लगातार बिकवाली का दौर जारी है। सोमवार को शेयर ₹21.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया, जो कि अगस्त 2024 में ₹157.53 पर पहुंचे अपने उच्चतम स्तर से 86.53% की भारी गिरावट दर्शाता है। सिर्फ एक दिन में शेयर 16% और पिछले एक महीने में 20.2% टूटा है। इसकी तुलना में, BSE Sensex पिछले एक साल में 6.81% बढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर लगभग ₹11,124 करोड़ रह गया है।
इस बिकवाली की मुख्य वजह कंपनी के चिंताजनक सेल्स आंकड़े और तेजी से घटता मार्केट शेयर है। फरवरी 2026 में Ola Electric ने केवल 3,968 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले महीने की तुलना में 47% कम है। इसके चलते कंपनी का मार्केट शेयर गिरकर सिर्फ 3.5% रह गया और यह भारत की टॉप 5 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनियों की लिस्ट से बाहर हो गई।
कॉम्पिटिशन में पीछे, मार्जिन में आगे?
मौजूदा मार्केट में, नई कंपनियों की बजाय पुरानी ऑटो कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। TVS Motor Company 28.3% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है, जिसने 61% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है। Bajaj Auto 22.67% शेयर के साथ दूसरे स्थान पर है, जिसने मार्च 2025 में रिकॉर्ड मंथली सेल्स दर्ज की। Ather Energy 72% की मजबूत ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दिखाते हुए तीसरे स्थान पर बनी हुई है। इसके विपरीत, Ola Electric का 3.5% का शेयर उसकी पिछली लीडरशिप स्थिति से एक बड़ी गिरावट दिखाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस मार्केट शेयर में भारी गिरावट के बावजूद, Ola Electric ने Q3 FY26 में अपने ग्रॉस मार्जिन को 34.3% तक बेहतर किया है, जो पिछले साल के 18.6% से काफी ज्यादा है। यह सुधार ऑपरेशनल खर्चों में भारी कटौती के कारण हुआ है, लेकिन यह रेवेन्यू में 55% की ईयर-ऑन-ईयर गिरावट को छिपा नहीं पा रहा, जो समान तिमाही में घटकर ₹470 करोड़ रह गया। कंपनी की कॉस्ट कटिंग की रणनीति, जिसे 'स्ट्रक्चरल रीसेट' कहा जा रहा है, अभी तक मार्केट का भरोसा जीतने या सेल्स बढ़ाने में कामयाब नहीं हुई है। कंपनी का P/E रेश्यो मार्च 2026 तक -5.05 पर बना हुआ है, जो लगातार घाटे और निवेशकों के संशय को दर्शाता है।
एग्जीक्यूशन की खामियां और मैनेजमेंट पर सवाल
कई रिपोर्ट्स और पूर्व एग्जीक्यूटिव्स के अनुसार, Ola Electric की मुश्किलें मैनेजमेंट की खामियों और फाउंडर Bhavish Aggarwal की लीडरशिप स्टाइल से जुड़ी हैं। आरोप हैं कि अवास्तविक डेडलाइन, माइक्रो-मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच लगभग 50% के हाई एट्रिशन रेट (नौकरी छोड़ने की दर) ने कंपनी के ऑपरेशन्स को अस्थिर कर दिया है। इसके अलावा, कंप्लायंस, डेटा मिसमैच और बोर्ड की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ रही हैं। कंपनी ने अपनी फिजिकल स्टोर की संख्या को भी 4,000 से घटाकर लगभग 550 करने की योजना बनाई है, जो ऑपरेशनल दबाव का संकेत है।
आगे का रास्ता
विश्लेषकों ने Ola Electric के प्रति सतर्क रवैया अपनाया है। कंसेंसस 'Sell' रेटिंग और ₹30.75 का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस दिया गया है, जो ₹20 से ₹45 के बीच है। कंपनी अपने मुख्य स्कूटर बिजनेस से आगे बढ़कर डाइवर्सिफिकेशन पर विचार कर रही है। मैनेजमेंट का जोर 15,000 यूनिट प्रति माह की सेल्स वॉल्यूम पर प्रॉफिटेबिलिटी और EBITDA ब्रेक-ईवन हासिल करने पर है। हालांकि, मार्केट शेयर में आई भारी गिरावट को ठीक करने और निवेशकों का भरोसा वापस जीतने के लिए सिर्फ मार्जिन सुधार या स्ट्रैटेजिक बदलाव काफी नहीं होंगे। इसके लिए कंसिस्टेंट एग्जीक्यूशन और सेल्स वॉल्यूम व कस्टमर ट्रस्ट में वास्तविक रिकवरी दिखानी होगी।