Ola Electric ने FY27 की पहली तिमाही में **₹455 करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **45%** कम है। हालांकि, कंपनी का नेट लॉस घटकर **₹336 करोड़** रह गया, जो पिछले साल के **₹428 करोड़** से काफी बेहतर है। यह सुधार ऑटोमोटिव रेवेन्यू में **72%** की तेजी के दम पर संभव हुआ है। कंपनी ने ₹780 करोड़ जुटाए हैं और अब वह डीलर-आधारित रिटेल मॉडल की ओर बढ़ रही है।
Ola Electric: रेवेन्यू में गिरावट, पर घाटे पर लगाम!
Ola Electric ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जो मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45% की भारी गिरावट आई है और यह ₹455 करोड़ पर आ गया है, जबकि पिछले साल यह ₹828 करोड़ था।
इसके बावजूद, कंपनी अपने कंसोलिडेटेड नेट लॉस को काबू करने में कामयाब रही है। इस तिमाही में नेट लॉस ₹336 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज ₹428 करोड़ के लॉस से काफी कम है।
पिछली तिमाही से शानदार रिकवरी!
अगर पिछली तिमाही यानी मार्च 2024 की बात करें, तो Ola Electric के नतीजों में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में 72% का उछाल आया और यह ₹265 करोड़ से बढ़कर ₹455 करोड़ हो गया। इस रिकवरी का मुख्य कारण इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री में आया उछाल है। कंपनी को इस तिमाही में 44,071 यूनिट्स के ऑर्डर मिले, जो पिछली तिमाही के 22,522 यूनिट्स से लगभग दोगुने हैं। इसी तरह, डिलीवरी भी बढ़कर 39,192 यूनिट्स तक पहुंच गई। इसके चलते, कंपनी का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में मार्केट शेयर बढ़कर 8.4% हो गया है।
कैपिटल जुटाया और स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव
अपने ग्रोथ प्लान्स और ऑपरेशंस को मजबूत करने के लिए Ola Electric ने इस तिमाही में ₹780 करोड़ का फंड जुटाया है। यह पैसा Qualified Institutions Placement (QIP) के जरिए लाया गया है, जिसमें कंपनी ने बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स को शेयर बेचे हैं। इस फंड से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और ऑपरेशनल खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कंपनी अपनी बिजनेस स्ट्रैटेजी में एक बड़ा बदलाव कर रही है। Ola Electric अब सीधे ग्राहकों को बेचने (direct-to-consumer) के मॉडल से हटकर डीलर-आधारित रिटेल मॉडल अपना रही है। इसका मकसद आफ्टर-सेल्स सर्विस को बेहतर बनाना और देश भर में अपनी पहुंच बढ़ाना है। कंपनी का लक्ष्य दिवाली 2026 तक इस डीलर नेटवर्क को पूरी तरह से लागू करने का है। हालांकि, इस नए मॉडल को लागू करने में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि घाटा कम हुआ है, लेकिन कुछ चिंताएं भी हैं। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन घटकर 30.5% रह गया है, जो पिछली तिमाही में 38.5% था। इसके अलावा, कंपनी के ऑडिटर ने सबसिडियरी Ola Cell Technologies में लिक्विडेटेड डैमेजेज से जुड़े एक अकाउंटिंग मुद्दे को उठाया है। ऑडिटर को इस संबंध में किसी वेवर रिक्वेस्ट के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
साथ ही, कंपनी SEBI की जांच के दायरे में भी है। यह जांच डिस्क्लोजर से संबंधित है।
आगे चलकर कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपने नए डीलर-आधारित सेल्स मॉडल को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाती है और क्या वह डिलीवरी में लगातार ग्रोथ बनाए रख पाती है, बिना मार्जिन पर और दबाव डाले। कंपनी ने Axis Energy के साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में भी साझेदारी की है। निवेशकों को डीलरशिप खुलने की रफ्तार और SEBI की जांच पर नजर रखनी चाहिए।
