अप्रैल 2026 में भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मार्केट पिछले साल के मुकाबले काफी मजबूती से आगे बढ़ा है। यात्री EVs की बिक्री 73% बढ़ी, जबकि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री 61% का उछाल दर्ज किया गया। इस ग्रोथ के पीछे नए मॉडल्स, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और फ्यूल की बढ़ती कीमतों (खासकर मध्य पूर्व में तनाव के बीच) जैसे कारण हैं। साथ ही, दोपहिया वाहनों के लिए PM E-DRIVE सब्सिडी का जुलाई 2026 तक बढ़ाया जाना भी मांग को सहारा दे रहा है, खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील खरीदारों के लिए।
मार्केट शेयर में बड़ा उलटफेर
ओवरऑल नंबर्स शानदार लग रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत काफी अलग है। Ola Electric, जो कभी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की लीडर थी, उसकी बिक्री में ईयर-ऑन-ईयर 38.6% की गिरावट आई है और यह 12,166 यूनिट्स पर आ गई है। कंपनी का मार्केट शेयर घटकर सिर्फ 8.2% रह गया है, जबकि एक साल पहले यह 21.4% था। यह गिरावट 2024 में 36.7% से शुरू होकर 2025 में 16.1% और मार्च 2026 तक 5.4% तक पहुँच गई थी। कंपनी की फाइनेंशियल ईयर 2026 की कुल बिक्री 1,64,000 यूनिट्स रही, जो पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम है।
इसके विपरीत, TVS Motor Company ने 88% की शानदार ईयर-ऑन-ईयर बिक्री बढ़त के साथ 37,661 यूनिट्स बेचे। Bajaj Auto की बिक्री 71.6% बढ़कर 32,883 यूनिट्स हुई, और स्टार्टअप Ather Energy ने 102% की ज़बरदस्त वृद्धि के साथ 27,024 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की।
दिग्गजों और स्टार्टअप्स की बढ़त
Ather Energy का मार्केट शेयर 2024 में 11.3% से बढ़कर 2025 में 16.2% हो गया है, जो Rizta स्कूटर जैसे नए मॉडल्स की सफलता को दर्शाता है। वहीं, TVS Motor (2025 में 24.2% मार्केट शेयर) और Bajaj Auto (2025 में 21.9% मार्केट शेयर) जैसी स्थापित कंपनियां अपने विशाल डिस्ट्रीब्यूशन और आफ्टर-सेल्स नेटवर्क का फायदा उठाकर बाज़ार में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
Ola Electric की मुश्किलें बढ़ीं
Ola Electric के मार्केट शेयर में यह गिरावट सिर्फ एक अस्थायी झटका नहीं है, बल्कि इसके पीछे कंपनी के ऑपरेशनल और कॉम्पिटेटिव इश्यूज हैं। ग्राहकों की सर्विस स्पीड और डिलीवरी में विश्वसनीयता को लेकर लगातार शिकायतें ब्रांड की भरोसेमंदता को नुकसान पहुंचा रही हैं। रेटिंग एजेंसी ICRA ने भी Ola Electric Technologies की सेल्स में गिरावट, लगातार नुकसान और प्रॉफिटेबिलिटी की अनिश्चित राह के चलते उसकी रेटिंग को डाउनग्रेड किया है। कंपनी को केवल कॉस्ट कटिंग से आगे बढ़कर ठोस रणनीति बनाने की ज़रूरत है।
मार्केट आउटलुक
भारत का EV मार्केट अब शुरुआती दौर से निकलकर तीव्र प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे में, जो कंपनियाँ ऑपरेशनल एफिशिएंसी, बेहतरीन कस्टमर सर्विस और स्केलेबल प्रोडक्शन पर ध्यान नहीं देंगी, उन्हें टिके रहने में मुश्किल होगी। स्थापित ब्रांड्स, जिनके पास मजबूत डीलर और सर्विस नेटवर्क है, फिलहाल अच्छी स्थिति में दिख रहे हैं।
