Ola Electric Mobility अपने रिटेल स्टोर्स के नेटवर्क में भारी कटौती कर रही है। कंपनी मार्च के अंत तक अपने स्टोर्स की संख्या को घटाकर केवल 550 कर देगी। यह एक बड़ा उलटफेर है, क्योंकि कुछ समय पहले ही कंपनी ने 4,000 स्टोर्स तक का विस्तार किया था। इस कदम से कंपनी के सामने चल रहे ऑपरेशनल और फाइनेंशियल प्रेशर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इस रणनीतिक बदलाव के साथ ही, कई बड़े एनालिस्ट्स ने भी कंपनी के आउटलुक पर चिंता जताई है। Citigroup ने Ola Electric को 'Sell' रेटिंग दी है और इसके टारगेट प्राइस को 51% घटाकर ₹27 कर दिया है। उनका मानना है कि भारत में ईवी (EV) की धीमी पैठ और इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) वाले व्हीकल्स के साथ कीमत का अंतर कम होना, कंपनी के लिए चुनौती है। Emkay Global Financial Services और Kotak Securities ने भी 'Sell' की सलाह दी है, जिनके टारगेट प्राइस ₹20 तक हैं। फिलहाल, कंपनी पर कवर करने वाले 8 में से 6 एनालिस्ट्स इसे बेचने की सलाह दे रहे हैं।
Ola Electric का मार्केट शेयर भी लगातार गिर रहा है। 2022-2024 के बीच 35-50% तक रहने वाला मार्केट शेयर अब घटकर Q3 2026 तक लगभग 6% रह गया है, जिससे यह इस सेगमेंट में पांचवें स्थान पर आ गई है। भले ही भारतीय ईवी टू-व्हीलर मार्केट 28.34% की सीएजीआर (CAGR) से बढ़ रहा है, Ola Electric की बिक्री में भारी गिरावट देखी गई है। 2025 में जहां कुल 12.8 लाख यूनिट्स बिकीं, वहीं Ola Electric की बिक्री साल-दर-साल 51% गिरकर 2 लाख यूनिट्स रही। इसके विपरीत, TVS Motor 28% मार्केट शेयर के साथ पहले, Bajaj Auto 21% के साथ दूसरे और Hero MotoCorp 11% के साथ तीसरे स्थान पर हैं। Ather Energy भी अपने प्रोडक्ट क्वालिटी और कस्टमर एक्सपीरियंस पर फोकस कर रही है।
कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ भी चिंताजनक है। Q3 FY26 के नतीजों में कंपनी का रेवेन्यू साल-दर-साल 55% घटकर ₹470 करोड़ रह गया है। ऑपरेटिंग लॉसेस बढ़कर -57.66% तक पहुंच गए हैं। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹12,130 करोड़ है, लेकिन डेट-टू-इक्विटी रेशियो 71.88% है। वहीं, -41.78% का निगेटिव आरओई (ROE) और -49.37% का निगेटिव आरओसीई (ROCE) इसकी लंबे समय की स्थिरता पर सवाल खड़े करते हैं। इन सबके बीच, कंपनी की उत्पाद गुणवत्ता और आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क में लगातार दिक्कतें बनी हुई हैं, जिससे ग्राहकों में असंतोष है।
Ola Electric के लिए आगे का रास्ता काफी मुश्किल नजर आ रहा है। कंपनी को अपनी ऑपरेशनल कमियों को सुधारना होगा, ग्राहकों का भरोसा जीतना होगा और अपने कैश बर्न को कंट्रोल करना होगा। ईवी मार्केट में बढ़त के बावजूद, घटते स्टोर्स और एनालिस्ट्स के निराशावादी नजरिए को देखते हुए, कंपनी के लिए वापसी करना एक बड़ी चुनौती होगी।