संस्थागत निवेशकों का भरोसा और EV की हकीकत
Ola Electric द्वारा ₹780 करोड़ का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) सफल रहा। यह दिखाता है कि बाजार की अस्थिरता के बावजूद बड़े निवेशक अभी भी EV सेक्टर में रुचि ले रहे हैं। हालांकि, इस नए फंड जुटाने से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी (Equity Dilution) कम होगी। निवेशक कंपनी के मुनाफे से ज्यादा उसके सर्विस नेटवर्क के विस्तार को देख रहे हैं। यह फंड Ola Electric के लिए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए अहम है, क्योंकि पुरानी ऑटो कंपनियां भी अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर ध्यान दे रही हैं।
Maruti Suzuki का इथेनॉल की ओर रुख
Maruti Suzuki की नई फ्लेक्स-फ्यूल Wagon R, पेट्रोल इंजन को पूरी तरह से छोड़ने के बजाय एक रणनीतिक कदम है। यह कार E20 से E100 तक इथेनॉल ब्लेंड्स पर चल सकती है। इससे कंपनी को सरकार के बायोफ्यूल नियमों का फायदा मिलेगा। लेकिन, इस कार को बड़े पैमाने पर अपनाने में बड़ी चुनौतियां हैं, जैसे कि देश में अभी तक इथेनॉल पंपों का पर्याप्त नेटवर्क नहीं है। यह कदम कंपनी को कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य के करीब लाता है, लेकिन कंपनी के मुनाफे पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह अभी भी पारंपरिक पेट्रोल इंजन पर आधारित है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर में विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर
वाहनों के अलावा, इंडस्ट्रियल सेक्टर भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। CG Power ने अपने नशीक प्लांट में S3 Unit-II फैसिलिटी शुरू की है। यह कदम बिजली पारेषण (Power Transmission) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए है, जो नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को ग्रिड से जोड़ने के लिए जरूरी है। इससे कंपनी की क्षमता 80% बढ़ जाएगी, जिससे वह सरकारी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स का फायदा उठा सकेगी। वहीं, Inox Green Energy ने Vena Energy के 6 GW पोर्टफोलियो को ₹6,000 करोड़ में खरीदकर एक बड़ा कंसॉलिडेशन किया है। इस बड़े कर्ज-आधारित अधिग्रहण से कंपनी के बैलेंस शीट पर शुरुआती दबाव आ सकता है, लेकिन यह उसकी ऑपरेशनल क्षमता को काफी बढ़ाएगा।
बाजार के लिए चिंताएं (Bear Case)
इन सब सकारात्मक खबरों के बावजूद, कुछ जोखिम बने हुए हैं। ऑटो सेक्टर में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और एंट्री-लेवल सेगमेंट में कमजोर मांग के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, कंपनियों का सरकार की नीतियों पर निर्भर रहना एक जोखिम है। अगर सरकार भविष्य में इथेनॉल या रिन्यूएबल एनर्जी के लिए सब्सिडी या अपनी नीतियों में बदलाव करती है, तो इन कंपनियों के बड़े पूंजीगत खर्चों (Capital Expenditure) पर असर पड़ सकता है।
