ओडिशा अपनी नई 'EV Policy 2.0' तैयार कर रहा है, जिसका लक्ष्य 2036 तक 50% इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का है। मौजूदा नियमों को सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। प्रदूषण से निपटने के लिए, राज्य शहरी-ग्रामीण रणनीति पर ध्यान केंद्रित करेगा, जो ऑटोमेकर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए अहम होगी। निवेशकों को सब्सिडी लागत और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार के बीच संतुलन पर नज़र रखनी चाहिए।
ओडिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों का नया दौर!
ओडिशा सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए अपनी 'EV Policy 2.0' पर काम कर रही है। इस नई पॉलिसी की तैयारी के लिए, राज्य ने अपनी मौजूदा 2021 की इलेक्ट्रिक वाहन नीति को 30 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दिया है। इस विस्तार से सरकार को अपनी रणनीति को और बेहतर बनाने का समय मिलेगा, जिसमें साल 2036 तक कुल नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों (BEVs) की हिस्सेदारी 50% तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
शहरी-ग्रामीण रणनीति पर फोकस
उद्योग विशेषज्ञ और पर्यावरण समूह राज्य को 'एक जैसा सब पर लागू' (one-size-fits-all) मॉडल से हटकर एक खास रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका तर्क है कि ओडिशा के विविध भौगोलिक परिदृश्य को देखते हुए, शहरी क्षेत्रों जैसे भुवनेश्वर और कटक में इलेक्ट्रिक कारों और बसों के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क की आवश्यकता है। वहीं, ग्रामीण इलाकों के लिए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ज्यादा उपयुक्त हो सकते हैं, जिन्हें अलग तरह के सपोर्ट और कम परिचालन लागत की जरूरत होती है। यह दृष्टिकोण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य प्रदूषण के बढ़ते स्तर से निपटने की कोशिश कर रहा है, जहां 2018 के बाद से PM10 की वार्षिक सांद्रता में लगातार वृद्धि देखी गई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
ऑटो और ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय निवेशकों और कंपनियों के लिए, नीति में यह बदलाव भविष्य की मांग का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दर बढ़ी है, जो 2021 में 1.16% से बढ़कर mid-2025 तक 8.71% तक पहुंचने का अनुमान है, यह 2025 के लिए निर्धारित 20% के शुरुआती लक्ष्य से काफी कम है। यह अंतर नई नीति की चुनौतियों को उजागर करता है, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता मांग के संबंध में।
सरकारी पहलें और भविष्य की राह
सरकार पहले से ही सरकारी क्षेत्र में मांग बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 1 जून, 2026 से, सरकारी उपयोग के लिए खरीदे जाने वाले सभी नए दोपहिया और चौपहिया वाहन इलेक्ट्रिक होने चाहिए। यह सरकारी खरीद EV निर्माताओं के लिए एक स्थिर और शुरुआती वॉल्यूम सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा, राज्य ने अब तक 550 से अधिक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए हैं। हालाँकि, नीति में चल रहे संशोधन से पता चलता है कि सरकार इन स्टेशनों के विस्तार की अधिक प्रभावी योजनाएं बना रही है, संभवतः राजमार्गों के किनारे चार्जिंग पॉइंट के लिए कम लागत पर जमीन की पेशकश करके।
जोखिम और आगे की राह
इस क्षेत्र के लिए मुख्य जोखिम कार्यान्वयन (execution) और वित्तीय स्थिरता से जुड़े हैं। एक व्यापक चार्जिंग नेटवर्क बनाने के लिए महत्वपूर्ण खर्च की आवश्यकता होगी, और सरकार वर्तमान में सब्सिडी और मोटर वाहन करों को राज्य के बजट पर अधिक दबाव डाले बिना कैसे तर्कसंगत बनाया जाए, इसका मूल्यांकन कर रही है। इसके अतिरिक्त, 'रेंज एंजाइटी' (range anxiety) - यानी चार्जिंग स्टेशन तक पहुंचने से पहले ही वाहन की बैटरी खत्म हो जाने का डर - अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है, खासकर बड़े शहरों के बाहर। निवेशकों को 2.0 नीति के अंतिम विवरणों पर नजर रखनी चाहिए, खासकर यह कि यह कैसे विकेंद्रीकृत ऊर्जा, जैसे मिनी-ग्रिड, को एकीकृत करने की योजना बना रही है ताकि उन क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशनों को बिजली मिल सके जहाँ बिजली की आपूर्ति अविश्वसनीय है।
