Nomura का बड़ा अनुमान: भारतीय ऑटो सेक्टर की ग्रोथ बढ़ेगी, SUV और EV की धूम!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Nomura का बड़ा अनुमान: भारतीय ऑटो सेक्टर की ग्रोथ बढ़ेगी, SUV और EV की धूम!

ब्रोकरेज फर्म Nomura ने भारतीय पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ा दिया है। कंपनी को लगातार कंज्यूमर डिमांड और बेहतर सप्लाई चेन की उम्मीद है। निवेशकों की नजर SUV की बढ़ती पॉपुलैरिटी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने पर है, जो इस सेक्टर के लिए मुख्य बूस्टर साबित होंगे।

Nomura की नई उम्मीदें

ब्रोकरेज फर्म Nomura ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए अपने अनुमानों में सुधार किया है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए वॉल्यूम ग्रोथ के अनुमान को ऊपर बढ़ाया है। फर्म का कहना है कि गाड़ियों की कीमतें बढ़ने और फ्यूल कॉस्ट में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय खरीदारों की डिमांड मजबूत बनी हुई है। इसका मतलब है कि मार्केट के दबावों के बावजूद, लोग नई गाड़ियां खरीदने के लिए उत्साहित हैं।

पैसेंजर व्हीकल और SUV की डिमांड

Nomura को उम्मीद है कि पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट इस सेक्टर की ग्रोथ में सबसे आगे रहेगा। ब्रोकरेज ने इस सेगमेंट के लिए वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 2027 में 13% और फाइनेंशियल ईयर 2028 में 6% कर दिया है। इस उम्मीद के पीछे सबसे बड़ा कारण स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल्स (SUVs) की ज़बरदस्त डिमांड है, जो कई ऑटो कंपनियों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गई हैं। सप्लाई चेन की दिक्कतें, जैसे ज़रूरी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की कमी, धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इससे उम्मीद है कि कंपनियां बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए ज़्यादा गाड़ियां बना पाएंगी।

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का बढ़ता दबदबा

पेट्रोल-डीज़ल वाली गाड़ियों के अलावा, रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की तरफ एक बड़े बदलाव का अनुमान लगाया गया है। पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में, इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी फाइनेंशियल ईयर 2026 में 3.9% से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 8.8% होने का अनुमान है। साल 2030 तक यह आंकड़ा 12.7% तक पहुंच सकता है। टू-व्हीलर सेगमेंट में भी यही ट्रेंड दिख रहा है, जहां इलेक्ट्रिक एडॉप्शन फाइनेंशियल ईयर 2026 में 6.6% से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2028 तक 11.3% होने की उम्मीद है, और दशक के अंत तक यह लगभग 20% तक पहुंच सकता है। निवेशकों के लिए यह एक अहम पहलू है, क्योंकि यह ऑटो कंपनियों के भविष्य के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

बाकी सेगमेंट्स का हाल

अन्य सेगमेंट्स के लिए भी ग्रोथ के अनुमानों को बढ़ाया गया है। टू-व्हीलर सेगमेंट में फाइनेंशियल ईयर 2027 में 8.5% और फाइनेंशियल ईयर 2028 में 6.6% ग्रोथ का अनुमान है। मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल्स (M&HCV), जिन्हें अक्सर इकोनॉमी का बैरोमीटर माना जाता है, के लिए ग्रोथ का अनुमान इसी अवधि के लिए 8% और 5% कर दिया गया है। इसके अलावा, ट्रैक्टर सेगमेंट, जो ग्रामीण आय और मॉनसून पर बहुत निर्भर करता है, फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए 5% ग्रोथ का अनुमान देखा गया है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

हालांकि सेक्टर का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, निवेशकों को कुछ बातों पर नज़र रखनी चाहिए। कंपनियों के लिए असली फायदा इनपुट कॉस्ट (Input Cost) बढ़ने और नए मॉडल्स के लॉन्च के बीच प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) बनाए रखने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ़्तार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) के विस्तार और सरकारी नीतियों पर टिकी रहेगी। नई टेक्नोलॉजी में निवेश करते हुए लागत का प्रबंधन करना, आने वाले तिमाही नतीजों में शेयरधारकों के लिए एक बड़ा ट्रेंड साबित होगा।

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