Nomura ब्रोकरेज फर्म ने Ather Energy के लिए अपना टारगेट प्राइस बढ़ाकर ₹1,470 कर दिया है। कंपनी भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद कर रही है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY30 तक मार्केट पेनिट्रेशन 19% तक पहुंच जाएगा।
Nomura का Ather Energy पर बड़ा दांव
ब्रोकरेज फर्म Nomura ने इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर निर्माता Ather Energy पर अपना भरोसा जताया है। उन्होंने कंपनी के लिए टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹1,470 कर दिया है। यह फैसला भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में आने वाली मजबूत ग्रोथ की उम्मीदों पर आधारित है। Nomura का अनुमान है कि FY30 तक भारत में कुल टू-व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक सेगमेंट की हिस्सेदारी लगभग 19% तक पहुंच सकती है, जो मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में लगभग 6.5% है।
नए सेगमेंट में एंट्री और विस्तार की योजना
Ather Energy अब मास-मार्केट सेगमेंट पर भी फोकस करने की तैयारी में है। कंपनी ₹1 लाख से ₹1.25 लाख के प्राइस रेंज को टारगेट कर रही है, जो कुल इंडस्ट्री डिमांड का लगभग 45% है। इसके लिए, कंपनी FY27 की तीसरी तिमाही तक अपने नए EL प्लेटफॉर्म पर आधारित एक किफायती स्कूटर लॉन्च करने की योजना बना रही है। इस विस्तार के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी भी तैयार की जा रही है, जिससे सप्लाई की कमी को दूर किया जा सके। इसके अलावा, कंपनी एक मोटरसाइकिल प्लेटफॉर्म भी विकसित कर रही है, जो भविष्य में ग्रोथ का एक नया जरिया बन सकता है।
वॉल्यूम ग्रोथ और मुनाफे का अनुमान
Nomura के वित्तीय अनुमानों के अनुसार, Ather Energy के वॉल्यूम में जबरदस्त बढ़ोतरी की उम्मीद है। FY27 के लिए 3.99 लाख यूनिट्स का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले 53% ज्यादा है। FY28 में यह 6.22 लाख यूनिट्स और FY29 में 8.24 लाख यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि कंपनी अभी नेगेटिव EBITDA मार्जिन पर काम कर रही है, लेकिन एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि FY29 तक यह सुधरकर 5.1% हो जाएगा। ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि कंपनी FY29 तक प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) के मामले में ब्रेक-ईवन हासिल कर सकती है। यह ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेटिव (PLI) स्कीम्स के खत्म होने से संभव हो सकता है।
EV सेक्टर के जोखिम और निवेशकों के लिए अहम बातें
EV इंडस्ट्री के सामने कुछ जोखिम भी हैं, जैसे कि अगर पेट्रोल की कीमतें स्थिर रहती हैं या कम होती हैं, तो ग्राहकों की पसंद EV से हट सकती है। इसके अलावा, कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी इस बात पर निर्भर करेगी कि वह प्रीमियम ब्रांड से मास-मार्केट प्लेयर के तौर पर कितनी सफलतापूर्वक खुद को ढाल पाती है, वो भी बिना मार्जिन को कम किए। निवेशकों को EL प्लेटफॉर्म के लॉन्च पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इसका एग्जीक्यूशन और ग्राहकों की स्वीकार्यता यह तय करेगी कि कंपनी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी मार्केट हिस्सेदारी बनाए रख पाती है या नहीं। मार्जिन और वॉल्यूम ग्रोथ की अंतिम दिशा भी सरकारी नीतियों और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए मिलने वाली सब्सिडी पर निर्भर करेगी।
