Nomura ने भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए जुलाई महीने में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान लगाया है। ब्रोकरेज के मुताबिक, पैसेंजर व्हीकल की थोक बिक्री (Wholesales) में पिछले साल की तुलना में **30%** की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज ने कम मॉनसून की बारिश को लेकर चिंता जताई है, जिससे ग्रामीण बिक्री, खासकर ट्रैक्टरों पर असर पड़ सकता है।
Detailed Coverage
ऑटो सेक्टर में दिख रही जबरदस्त मांग
Nomura की लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए जुलाई 2026 एक बेहतरीन महीना साबित हो सकता है। पैसेंजर व्हीकल, टू-व्हीलर, कमर्शियल व्हीकल और ट्रैक्टर सेगमेंट में डिमांड मजबूत बनी हुई है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि पैसेंजर व्हीकल की थोक बिक्री 4,52,000 यूनिट्स तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 30% ज्यादा है।
लेकिन, रिटेल बिक्री (Retail Sales) में ग्रोथ थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है, जो 11% बढ़कर 3,86,000 यूनिट्स पर पहुंच सकती है। थोक बिक्री और रिटेल बिक्री के बीच यह अंतर 66,000 यूनिट्स की इन्वेंटरी बिल्डअप (Inventory Buildup) का संकेत देता है। यह वो आंकड़ा है जिस पर निवेशक अक्सर पैनी नज़र रखते हैं, क्योंकि ज्यादा इन्वेंटरी भविष्य में डीलरों पर दबाव बना सकती है।
टू-व्हीलर और कमर्शियल सेगमेंट में भी उछाल
टू-व्हीलर सेगमेंट में भी अच्छी तेजी दिख रही है। Nomura का अनुमान है कि इस सेगमेंट में थोक बिक्री 19.14 लाख यूनिट्स को पार कर सकती है, जो पिछले साल के मुकाबले 23% अधिक है। रिटेल बिक्री इससे भी तेज रफ्तार से, 31% बढ़कर 18.55 लाख यूनिट्स तक पहुंचने का अनुमान है।
कमर्शियल व्हीकल की बात करें तो, मीडियम और हैवी व्हीकल (MHCV) की थोक बिक्री 29% बढ़कर लगभग 35,000 यूनिट्स रहने का अनुमान है। वहीं, रिटेल बिक्री 23% बढ़कर 38,200 यूनिट्स तक जा सकती है। ट्रैक्टर सेगमेंट में भी 20% की थोक बिक्री ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन यह सेक्टर कृषि कारकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
EV को बढ़ावा और इंडस्ट्री के रिस्क
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को अपनाना लगातार बढ़ रहा है। पैसेंजर व्हीकल में EV का पेनिट्रेशन 7.8% और टू-व्हीलर्स में 10.6% रहने का अनुमान है। इसके बावजूद, Nomura का कहना है कि बाजार में अभी भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है, सप्लाई की कमी के चलते 15-20% का सप्लाई-डिमांड गैप बना हुआ है।
जहां एक ओर इंडस्ट्री का आउटलुक पॉजिटिव है, वहीं ब्रोकरेज ने कुछ ऐसे रिस्क भी बताए हैं जो प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता मॉनसून को लेकर है, जो फिलहाल सामान्य से 15% कम चल रहा है। बारिश में बड़ी कमी अक्सर ग्रामीण मांग को कम कर देती है, जिसका सीधा असर ट्रैक्टरों की बिक्री और ग्रामीण खपत पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, इंडस्ट्री को मार्जिन पर भी दबाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि कमोडिटी की कीमतें नरम हुई हैं, लेकिन इसका पूरा फायदा अभी ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है। Nomura का मानना है कि अगर कंपनियां मास-मार्केट पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर सेगमेंट में और दाम बढ़ाती हैं, तो इससे खरीदार हिचक सकते हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 में अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में दाम और लागत के दबाव का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि रिटेल डिमांड थोक बिक्री के उच्च आंकड़ों से मेल खाती है या नहीं और मॉनसून की चाल ग्रामीण क्रय शक्ति को कैसे प्रभावित करती है।
