नेट-ज़ीरो की ओर बढ़ाए कदम
Niti Aayog की 'Scenarios Towards Vikshit Bharat and Net Zero' रिपोर्ट में एक बड़े बदलाव का रोडमैप बताया गया है। इसके अनुसार, 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह शून्य पर लाने के लिए, 2055 तक 100% जीरो-एमिशन वाहनों (ZEVs) का मार्केट शेयर हासिल करना होगा। इस लंबी अवधि के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory framework) की जरूरत है। रिपोर्ट में कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) मानकों में मौजूदा छूट को 'सनसेट' (sunset) करने की बात कही गई है। यह कदम नियमों को विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार रखने में मदद करेगा, जिससे भारत का ऑटोमोटिव सेक्टर (automotive sector) वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठा सकेगा।
लाइफसाइकिल एमिशन और बायोफ्यूल का महत्व
सिर्फ एग्जॉस्ट (exhaust) से निकलने वाले उत्सर्जन पर ही नहीं, बल्कि रिपोर्ट टिकाऊ बायोफ्यूल (biofuels) के पूरे लाइफसाइकिल (lifecycle) फायदों को भी ध्यान में रखने पर जोर देती है। इन स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को ऑटोमोटिव फ्यूल मिक्स (fuel mix) में शामिल करने से कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) को काफी कम करने में मदद मिल सकती है। Niti Aayog का यह रुख सख्त पर्यावरणीय जनादेशों (environmental mandates) को पूरा करने के लिए वाहन दक्षता (vehicle efficiency) में सुधार के साथ-साथ फ्यूल टेक्नोलॉजी में प्रगति को महत्व देने वाला एक समग्र दृष्टिकोण (holistic approach) सुझाता है।
ऑटोमेकर्स के लिए पॉलिसी (Policy) के मायने
इस रणनीति का मतलब है कि ऑटोमोटिव इंडस्ट्री को अपनी प्रोडक्ट डेवलपमेंट (product development) और मार्केटिंग स्ट्रैटेजीज (marketing strategies) को छोटे, अधिक कुशल और वैकल्पिक ईंधन (alternative-fuel) वाले वाहनों के पक्ष में बदलना होगा। यह बदलाव नए कार खरीदारों के लिए अफोर्डेबिलिटी के अंतर को पाटने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अक्सर दोपहिया वाहन से ऊपर की ओर बढ़ते हैं और वैल्यू-फॉर-मनी (value-for-money) विकल्प तलाशते हैं। इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) को ऐसे नीतिगत बदलावों का अनुमान लगाना होगा जो उच्च-उत्सर्जन वाले वाहनों को तेजी से हतोत्साहित करेंगे।
यह रणनीतिक दिशा दक्षता और पहुंच (accessibility) द्वारा संचालित एक स्वच्छ, अधिक टिकाऊ भारतीय ऑटोमोटिव भविष्य का मंच तैयार करती है।