Nissan का नया प्रोडक्ट आक्रामक प्लान
Nissan India ने अपने पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए जोरदार कदम उठाया है। कंपनी ने हाल ही में 7-सीटर Gravite MPV लॉन्च की है, जिसकी कीमत ₹5.65 लाख से ₹8.49 लाख के बीच रखी गई है। यह MPV 1-लीटर पेट्रोल इंजन के साथ आती है। यह लॉन्च इस साल के अंत तक कंपनी के प्रोडक्ट साइकिल का पहला कदम है, जिसके तहत Tekton SUV और एक और बड़ी 7-सीटर C-सेगमेंट SUV भी बाज़ार में लाई जाएंगी। इन नई गाड़ियों के साथ, Nissan अपने मौजूदा सिंगल-मॉडल (Magnite) लाइनअप को बढ़ाकर कुल चार मॉडल तक ले जाने की तैयारी में है, जो लगभग ₹6 लाख से ₹20 लाख तक के प्राइस बैंड को कवर करेंगे। कंपनी का लक्ष्य वितीय वर्ष 2026-27 तक अपने घरेलू (domestic) बिक्री को दोगुना करने और उतनी ही, यानी 100,000 यूनिट सालाना, एक्सपोर्ट (export) वॉल्यूम हासिल करने का है।
भारतीय बाज़ार में तगड़ा कॉम्पिटिशन
Nissan की यह महत्वाकांक्षी योजना भारत के बेहद कॉम्पिटिटिव ऑटोमोटिव बाज़ार में आई है। भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) सेक्टर, जिसके 2034 तक $248 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, पर SUVs और MPVs का दबदबा है। पिछले कैलेंडर वर्ष 2025 में अकेले यूटिलिटी व्हीकल्स (Utility Vehicles) की बिक्री लगभग 30 लाख यूनिट रही, जो पिछले साल के मुकाबले 7.4% ज़्यादा है। इस सेगमेंट में Maruti Suzuki का मार्केट शेयर 40% से भी ज़्यादा है, वहीं Mahindra, Hyundai और Tata Motors जैसी कंपनियां भी बहुत मज़बूत पकड़ रखती हैं। Nissan India का फिलहाल मार्केट शेयर बहुत ही मामूली, करीब 0.5% से 1% के बीच है। Gravite MPV का मुकाबला सीधे तौर पर Maruti Suzuki Ertiga जैसी सफल गाड़ियों से होगा, जबकि Kia Carens भी एक मज़बूत दावेदार है। आने वाली Tekton SUV को Hyundai Creta जैसी मिड-साइज़ SUVs से सीधी टक्कर मिलेगी, जो कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट (2024 में कुल SUV मार्केट का 49.33% हिस्सा) में पहले से ही बहुत पॉपुलर हैं।
ग्लोबल लेवल पर वित्तीय दबाव
Nissan का यह इंडिया प्लान ऐसे समय में आ रहा है जब कंपनी ग्लोबल स्तर पर वित्तीय मुश्किलों से जूझ रही है। Nissan Motor Co., Ltd. का पिछले बारह महीनों (TTM) का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेशियो लगातार -1.5x से -1.7x के बीच नेगेटिव बना हुआ है, जो ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के औसत P/E 14.5 के मुकाबले काफी कम है। इसकी वजह कंपनी का घाटे में चलना है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने नवंबर 2025 में कंपनी की रेटिंग घटाकर 'BB-' कर दी थी और आउटलुक को 'नेगेटिव' रखा था। कंपनी की अनुमानित EBITDA मार्जिन वितीय वर्ष 2027 तक लगभग 3% तक ही पहुँचने की उम्मीद है। ग्लोबल मार्केट में Nissan की कुल मार्केट कैप लगभग $8.5 से $10.75 बिलियन के बीच है, जो कई बड़ी कार कंपनियों के मुकाबले काफी कम है। इन ग्लोबल वित्तीय दबावों के बावजूद, Nissan भारत को एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट बेस के तौर पर देख रही है, और वितीय वर्ष 2026-27 तक 100,000 यूनिट सालाना एक्सपोर्ट का लक्ष्य रखा है। भारत पहले से ही यूके के बाद Nissan का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्ट बेस है।
'Re: Nissan' प्लान और भारत की चुनौती
दुनियाभर में, Nissan अपनी "Re: Nissan" नाम की बड़ी रीस्ट्रक्चरिंग (restructuring) योजना पर काम कर रही है। इसके तहत प्लांट बंद किए जा रहे हैं और 2027 तक 20,000 कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी ताकि कंपनी भारी घाटे से उबर सके। मार्च 2025 में खत्म हुए वितीय वर्ष में कंपनी को $4.5 बिलियन का नेट लॉस (net loss) हुआ था। यह वित्तीय अस्थिरता नेगेटिव P/E रेशियो और S&P की 'BB-' रेटिंग में साफ दिखती है। भारत में, Nissan की पिछली बाज़ार पैठ की कोशिशें मिली-जुली रही हैं। हालांकि 2020 में Magnite SUV ने कंपनी की टर्नअराउंड (turnaround) में मदद की थी, लेकिन 2021 तक के पुराने बड़े लक्ष्य पूरे नहीं हो सके थे। मौजूदा प्रोडक्ट आक्रामक प्लान भले ही उम्मीद जगाता हो, लेकिन यह उन बाज़ारों में आ रहा है जहाँ स्थापित कंपनियों का दबदबा, मज़बूत डीलर नेटवर्क और ब्रांड लॉयल्टी बहुत ज़्यादा है। Nissan के 1% से भी कम के मौजूदा मार्केट शेयर के साथ, वितीय वर्ष 2026 तक घरेलू बिक्री को तीन गुना करने का लक्ष्य एक बड़ी चुनौती है।
विश्लेषकों का नज़रिया
Nissan Motor Co., Ltd. के लिए विश्लेषकों (analysts) का नज़रिया फिलहाल सतर्क है। विभिन्न फर्मों की रेटिंग के आधार पर, सर्वसम्मति "मॉडरेट सेल" (Moderate Sell) की सिफारिश कर रही है। विश्लेषकों का औसत 12-महीने का टारगेट प्राइस लगभग ¥343.54 है, जो मौजूदा ट्रेडिंग प्राइस ¥460 से काफी कम है। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में स्टॉक में गिरावट की संभावना हो सकती है। हालांकि, Nissan ने "Re: Nissan" प्लान के तहत लागत में बड़ी बचत और मार्च 2026 में समाप्त होने वाले वितीय वर्ष के लिए ऑपरेटिंग लॉस (operating loss) के अनुमानों में कमी का अनुमान लगाया है, फिर भी समेकित नेट लॉस (consolidated net loss) काफी बड़ा रहने की उम्मीद है, जिसका बड़ा कारण नॉन-कैश रीस्ट्रक्चरिंग चार्जेज (non-cash restructuring charges) हैं। भारत में आने वाले नए प्रोडक्ट्स की सफलता और कंपनी द्वारा अपने बड़े वॉल्यूम लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता, Nissan के वित्तीय सुधार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
