Nissan India ने 2 लाख सालाना गाड़ियों की बिक्री का लक्ष्य रखा है। कंपनी अब एक्सपोर्ट और डोमेस्टिक (घरेलू) बिक्री के बीच **50-50** का संतुलन बनाना चाहती है। भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए कंपनी नई मिड-साइज़ SUV 'Tekton' लॉन्च कर रही है, जो लंबे समय से एक्सपोर्ट पर निर्भरता कम करने की कोशिश का हिस्सा है।
2 लाख गाड़ियों की बिक्री का लक्ष्य
Nissan Motor India ने अपनी सालाना वाहन बिक्री को 2 लाख तक पहुंचाने के लिए एक नई रणनीति का खुलासा किया है। कंपनी अपने रेवेन्यू मॉडल को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसका लक्ष्य भारत में डोमेस्टिक बिक्री और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोर्ट के बीच 50-50 का बंटवारा करना है। यह ऑटोमेकर के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है, क्योंकि पारंपरिक रूप से कंपनी का बिजनेस मॉडल चेन्नई के पास स्थित अपने प्लांट में निर्मित वाहनों के एक्सपोर्ट पर बहुत अधिक निर्भर रहा है।
नई SUV 'Tekton' से बढ़ेगी भारत में मौजूदगी
इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए, कंपनी अपने प्रोडक्ट रेंज का विस्तार कर रही है। नई मिड-साइज़ SUV, Tekton के अनावरण के दौरान, मैनेजिंग डायरेक्टर सौरभ वत्स (Saurabh Vatsa) ने बताया कि कंपनी मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के अंत तक सिर्फ एक प्रोडक्ट की मौजूदगी से बढ़कर चार-गाड़ियों के लाइनअप तक पहुंचने की राह पर है। भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर में मिड-साइज़ SUV सेगमेंट सबसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में से एक है, जिस पर वर्तमान में Mahindra & Mahindra, Hyundai और Maruti Suzuki जैसे स्थापित ब्रांडों का दबदबा है।
कॉम्पिटिटिव SUV मार्केट में चुनौतियां
भारतीय मिड-साइज़ SUV सेगमेंट में भारी प्रतिस्पर्धा है, जहां मांग तो बहुत है, लेकिन कीमतों का दबाव भी अत्यधिक है। Tekton की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Nissan मौजूदा लोकप्रिय मॉडलों की तुलना में फीचर्स, कीमत और आफ्टर-सेल्स सर्विस नेटवर्क की पहुंच के मामले में कितनी प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर पाती है। जबकि प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार अधिक ग्राहकों तक पहुंचने में मदद करता है, कंपनी को डोमेस्टिक मार्केट में ब्रांड रिकॉल को फिर से बनाने की कोशिश में हाई कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट (ग्राहक अधिग्रहण लागत) का सामना करना पड़ेगा। एक्सपोर्ट-केंद्रित बिजनेस के विपरीत, डोमेस्टिक मार्केट में लंबी अवधि की बिक्री ग्रोथ के लिए एक व्यापक सर्विस और डीलरशिप नेटवर्क की आवश्यकता होती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशक कंपनी की डीलरशिप फुटप्रिंट (नेटवर्क) के विस्तार और Tekton की मार्केट एक्सेप्टेंस (बाजार स्वीकृति) की प्रगति पर नजर रख सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से, कंपनी ने अपने पुराने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो के कारण भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी में उतार-चढ़ाव देखा है। नए मॉडलों को सफलतापूर्वक लॉन्च करने और उनकी रुचि बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी प्रोडक्ट रोलआउट में देरी या खराब मांग से कंपनी के मार्जिन और लक्षित बिक्री मात्रा को प्राप्त करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, जैसे-जैसे कंपनी अधिक डोमेस्टिक-केंद्रित रणनीति अपना रही है, लोकल मार्केटिंग और नेटवर्क विस्तार की ओर कंपनी के कैपिटल एलोकेशन (पूंजी आवंटन) पर नजर रखना एक महत्वपूर्ण कारक होगा।
