Nissan India की बड़ी रणनीति: EV नहीं, इन गाड़ियों पर दांव, जानिए क्या है वजह

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AuthorNeha Patil|Published at:
Nissan India की बड़ी रणनीति: EV नहीं, इन गाड़ियों पर दांव, जानिए क्या है वजह
Overview

Nissan Motor Corp. भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लेकर एक मापा हुआ कदम उठा रही है। कंपनी फिलहाल अपने मौजूदा इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) सेगमेंट, जैसे Gravite कॉम्पैक्ट SUV और एक नए सेवन-सीटर C-SUV पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

Nissan India की नई रणनीति: बाजार की हकीकत पर फोकस

Nissan Motor Corporation भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को लेकर एक मापा हुआ कदम उठा रही है। कंपनी फिलहाल अपने मौजूदा इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) सेगमेंट, जैसे Gravite कॉम्पैक्ट SUV और एक नए सेवन-सीटर C-SUV पर ज्यादा ध्यान दे रही है। कंपनी के एग्जीक्यूटिव Thierry Sabbagh ने जोर देकर कहा कि EV को अपनाना मार्केट की डिमांड से तय होना चाहिए, न कि किसी दबाव से। उन्होंने बताया कि फिलहाल भारत में लगभग 6.5% वाहन ही इलेक्ट्रिक हैं। यह रणनीति Nissan की ग्लोबल "Re: Nissan Recovery Plan" के तहत है, जो लागत कम करने और मास-मार्केट प्रोडक्ट्स से मुनाफा बढ़ाने पर केंद्रित है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर व्हीकल मार्केट है, जहां सालाना लगभग 4.6 मिलियन यूनिट्स की बिक्री होती है। कंपनी इस साल तीन नए व्हीकल लॉन्च करने की तैयारी में है, जिनमें EVs पर विचार बाजार के तैयार होने पर ही किया जाएगा।

ग्लोबल प्लान और भारतीय बाजार का तालमेल

भारत में EV को लेकर यह सतर्क रवैया Nissan की ग्लोबल "Re: Nissan Recovery Plan" का हिस्सा है। इस प्लान का मुख्य लक्ष्य लागत को कम करके 5% ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन हासिल करना और कैश फ्लो बढ़ाना है। भारत के मजबूत ICE सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करके, Nissan का लक्ष्य तुरंत रेवेन्यू और मार्केट शेयर हासिल करना है। इसकी तुलना में, Tata Motors भारतीय EV सेगमेंट में लगभग 70% मार्केट शेयर के साथ आगे है। Maruti Suzuki, जो ICE में मजबूत है, अपनी पहली EV 2025-2026 तक पेश कर सकती है। Hyundai भी भारत में अपनी EV रेंज बढ़ा रहा है। Nissan की रणनीति एक बड़े मार्केट में प्रॉफिटेबल ग्रोथ पर जोर देती है, और EV में बड़ा निवेश तब तक टाला जाएगा जब तक भारतीय ग्राहकों और इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त सुधार न हो जाए।

भविष्य की राह और जोखिम

Nissan के इस कदम से फिलहाल तो कंपनी को तुरंत मुनाफा कमाने में मदद मिलेगी, लेकिन तेज़ी से बदलते ऑटोमोटिव जगत में इसके कुछ जोखिम भी हैं। भारत जैसे बड़े ग्रोथ मार्केट में EV पर कम ध्यान देने से कंपनी पिछड़ सकती है, खासकर अगर EV को अपनाने की गति उम्मीद से तेज़ हो जाए। हालांकि ICE सेगमेंट फिलहाल हावी है, लेकिन लंबे समय में इस पर रेगुलेटरी और पर्यावरणीय दबाव बढ़ेगा। Tata Motors जैसी कंपनियां पहले ही EV स्पेस में महत्वपूर्ण मार्केट शेयर और ब्रांड लॉयल्टी हासिल कर चुकी हैं। इसके अलावा, केवल ICE मॉडल्स पर निर्भरता युवा और पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहकों को आकर्षित करने में बाधा बन सकती है। कंपनी के स्टॉक की बात करें तो यह फिलहाल JPY 650 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिसका P/E 8.5x और मार्केट कैप लगभग $20 बिलियन USD है।

Nissan ने संकेत दिया है कि वे भारत के लिए इको-फ्रेंडली विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अभी कोई खास जानकारी नहीं दी गई है। कंपनी की विस्तार योजनाएं भारत के आर्थिक विकास का फायदा उठाने पर केंद्रित हैं। पहले लोकप्रिय ICE मॉडल लॉन्च करने का फोकस, एक मजबूत नींव बनाने के बाद ही EV में बड़े पैमाने पर उतरने की रणनीति को दर्शाता है। यह कदम इस बात पर निर्भर करता है कि भारतीय बाजार में आने वाले समय में इंटरनल कम्बस्चन इंजन का दबदबा बना रहता है या नहीं।

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