Nissan India के लिए जुलाई का महीना शानदार रहा! कंपनी की कुल थोक बिक्री (wholesale sales) **66.5%** बढ़कर **9,339 यूनिट** पर पहुंच गई। यह बढ़त घरेलू मांग में तेज रिकवरी के कारण हुई, जो तीन गुना से ज्यादा बढ़कर **4,518 यूनिट** हो गई।
घरेलू बिक्री में जोरदार उछाल
Nissan Motor India ने जुलाई 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पिछले साल के मुकाबले अपनी कुल थोक बिक्री (wholesale dispatches) में 66.5% की बढ़त दर्ज की है। कंपनी 9,339 यूनिट बेचने में कामयाब रही। घरेलू बाजार में कंपनी की बिक्री में जबरदस्त तेजी देखी गई, जो पिछले साल के 1,420 यूनिट के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 4,518 यूनिट हो गई। यह लगातार चौथा महीना है जब डोमेस्टिक सेल्स में साल-दर-साल आधार पर ग्रोथ दर्ज की गई है।
एक्सपोर्ट में भी स्थिरता
घरेलू बाजार में वापसी के साथ-साथ, कंपनी के एक्सपोर्ट ऑपरेशंस में भी लगातार ग्रोथ जारी रही। जुलाई में 4,821 यूनिट का एक्सपोर्ट किया गया, जो जुलाई 2025 के 4,188 यूनिट से ज्यादा है। डोमेस्टिक और एक्सपोर्ट दोनों वॉल्यूम को संतुलित करके, कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल कर रही है। जुलाई की यह ग्रोथ जून के 8,346 यूनिट के कुल थोक बिक्री के बाद आई है, जिसमें 16% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की गई थी।
Magnite और Gravite का जलवा
कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि बिक्री में आई इस तेजी की मुख्य वजह कॉम्पैक्ट SUV Magnite की लगातार लोकप्रियता और हाल ही में लॉन्च हुई 7-सीटर B-MPV Gravite है। SUVs और मल्टी-पर्पज व्हीकल्स पर फोकस करने की यह स्ट्रैटेजी भारत में हाई-यूटिलिटी पैसेंजर व्हीकल्स की बढ़ती मांग को भुनाने के लिए बनाई गई है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच चुनौती
हालांकि, भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर में कॉम्पिटिशन बहुत कड़ा है। कॉम्पैक्ट SUV और MPV सेगमेंट में Maruti Suzuki, Hyundai, और Tata Motors जैसे बड़े प्लेयर्स मौजूद हैं, जो आक्रामक प्राइसिंग और बड़े डीलरशिप नेटवर्क के दम पर अपनी मार्केट हिस्सेदारी बनाए हुए हैं। Nissan के लिए आगे की चुनौती इस बिक्री की गति को बनाए रखने के साथ-साथ प्रोडक्शन कॉस्ट को कंट्रोल करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि Gravite अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले बाजार में अपनी जगह बना सके। इन्वेस्टर्स इस बात पर भी नजर रखेंगे कि कंपनी इन बढ़ते वॉल्यूम को बेहतर प्रॉफिट मार्जिन में कैसे बदल पाती है, खासकर भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में मार्केटिंग और प्रमोशन पर होने वाले भारी खर्च को देखते हुए।
