2 सितंबर, 2026 को Nifty Auto इंडेक्स में **2%** से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसकी मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड का **$90** प्रति बैरल के पार जाना और जियोपॉलिटिकल टेंशन है, जिसने अगस्त की मजबूत सेल्स रिपोर्ट के उत्साह को ठंडा कर दिया है।
मुनाफे पर मार का डर
ऑटो कंपनियों के लिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें किसी बड़े खतरे से कम नहीं हैं। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रबर, प्लास्टिक और अन्य रॉ मटीरियल की लागत बढ़ जाती है। जब क्रूड का भाव $90 के स्तर को पार करता है, तो निवेशकों को डर सताने लगता है कि इसका सीधा असर कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनियां अपनी बढ़ती लागत का बोझ प्राइस-सेंसिटिव ग्राहकों पर डाल पाएंगी या नहीं। यही कारण है कि अच्छी सेल्स वॉल्यूम की खबरों के बावजूद बाजार में मुनाफावसूली (Profit-booking) हावी है।
आंकड़ों और मार्केट के बीच तालमेल की कमी
फिलहाल मार्केट में एक अजीब स्थिति है। जहां अगस्त के सेल्स डेटा ने कमर्शियल और पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में शानदार ग्रोथ दिखाई थी, वहीं निवेशक अब पास्ट परफॉरमेंस के बजाय भविष्य के रिस्क पर नजर टिकाए हुए हैं। महंगाई का खतरा और आने वाले समय में ग्रोथ में सुस्ती की संभावनाओं ने बड़े-बड़े दिग्गज शेयरों में भी बिकवाली छेड़ दी है।
दिग्गज कंपनियों पर असर
बिकवाली का असर पूरे सेक्टर पर साफ दिखा। Eicher Motors, Tube Investments of India और Samvardhana Motherson जैसे स्टॉक्स में 2.6% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। वहीं, Hero MotoCorp, Mahindra & Mahindra और Tata Motors के शेयरों में भी काफी दबाव रहा। अब निवेशकों की नजरें ग्लोबल एनर्जी कीमतों पर टिकी हैं। अगर क्रूड ऑयल के दाम और बढ़ते हैं, तो ऑटो सेक्टर के वैल्यूएशन पर और दबाव आना तय है।
