बुधवार को Nifty Auto इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली। अगस्त के सेल्स डेटा में साल-दर-साल तो ग्रोथ दिखी, लेकिन मंथली गिरावट और डीलर्स के पास बढ़े हुए स्टॉक ने निवेशकों को डरा दिया है।
बुधवार को Nifty Auto इंडेक्स पर निवेशकों की बिकवाली हावी रही। हालांकि कई ऑटो कंपनियों ने पिछले साल के मुकाबले ग्रोथ दिखाई है, लेकिन मंथ-ऑन-मंथ (MoM) डेटा में सुस्ती ने मार्केट सेंटीमेंट को खराब कर दिया है।
इन्वेंट्री का बढ़ता बोझ
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता डीलर्स के पास जमा इन्वेंट्री को लेकर है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले डीलर्स के पास स्टॉक का स्तर काफी ऊपर चला गया है। जब इन्वेंट्री जरूरत से ज्यादा होती है, तो कंपनियों को स्टॉक क्लियर करने के लिए डिस्काउंट बढ़ाना पड़ता है या फिर प्रोडक्शन में कटौती करनी पड़ती है। दोनों ही स्थितियां कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर डालती हैं, जिसकी वजह से शेयरहोल्डर्स अब सतर्क हो गए हैं।
अलग-अलग सेगमेंट का हाल
टू-व्हीलर और पैसेंजर व्हीकल कंपनियों में मिला-जुला रिएक्शन देखा गया। उदाहरण के लिए, Maruti Suzuki ने सालाना आधार पर भले ही ग्रोथ दिखाई हो, लेकिन जुलाई के मुकाबले बिक्री में आई गिरावट ने डिमांड कम होने का संकेत दिया है। इसी तरह Hero MotoCorp और Eicher Motors के शेयर भी दबाव में दिखे। Bajaj Auto के वॉल्यूम नंबर बेहतर होने के बावजूद पूरे सेक्टर का मिजाज सुस्त रहा। Tata Motors और Mahindra & Mahindra जैसे दिग्गजों पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।
आगे क्या है निवेशकों की नजर में?
अब सबकी निगाहें आने वाले फेस्टिव सीजन की डिमांड पर टिकी हैं। मैन्युफैक्चरर्स को उम्मीद है कि त्यौहारों में खरीदारी बढ़ेगी और पुराना स्टॉक क्लियर हो जाएगा। लेकिन अगर मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, तो आने वाली तिमाहियों में सेक्टर के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, भारत फोर्ज (Bharat Forge) और बॉश (Bosch) जैसी ऑटो एंसिलरी कंपनियों पर भी नजर रहेगी, क्योंकि इनका प्रदर्शन सीधे तौर पर बड़ी ऑटो कंपनियों के प्रोडक्शन लेवल से जुड़ा है।
