नई गाड़ियों का बीमा हुआ लंबा! SC के फैसले से बढ़ेगी गाड़ी की On-road कीमत

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AuthorNeha Patil|Published at:
नई गाड़ियों का बीमा हुआ लंबा! SC के फैसले से बढ़ेगी गाड़ी की On-road कीमत

सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाकर **4 साल** और दोपहिया वाहनों के लिए **6 साल** कर दी है। इस फैसले का मकसद सड़कों पर बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या कम करना है। हालांकि, इससे नई गाड़ी खरीदते समय ग्राहकों को शुरुआत में ज्यादा पैसे देने होंगे।

नई गाड़ियों का इंश्योरेंस अब 4 और 6 साल के लिए अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) को निर्देश दिया है कि नए वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाई जाए। नई गाइडलाइंस के तहत, कार खरीदारों को अब 4 साल का थर्ड-पार्टी कवर खरीदना होगा, जबकि नए दोपहिया वाहन खरीदने वालों को 6 साल का इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा। यह फैसला पिछले अनिवार्य इंश्योरेंस नियमों में 1 साल की बढ़ोतरी करता है, जिसका सीधा असर देश भर में नई गाड़ियों की ऑन-रोड कीमत पर पड़ेगा।

गाड़ी की लागत और ग्राहकों के पास विकल्प

इस नए नियम से ग्राहकों को गाड़ी खरीदते समय शुरुआत में ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस स्ट्रक्चर को और पारदर्शी बनाने का आदेश दिया है। अब खरीदारों को एक स्टैंडर्ड कस्टमर ऑप्शन फॉर्म दिया जाएगा, जिसमें उन्हें तीन तरह के प्रोटेक्शन चुनने का विकल्प मिलेगा। इसमें गाड़ी में बैठे यात्रियों के लिए कवर, मालिक-ड्राइवर और यात्रियों के लिए पर्सनल एक्सीडेंट कवर, और ओन-डैमेज इंश्योरेंस शामिल हैं। जहां थर्ड-पार्टी कवर अब लंबे समय के लिए अनिवार्य है, वहीं इंश्योरेंस कंपनियां अपनी रिस्क असेसमेंट और मार्केट के हिसाब से ओन-डैमेज पॉलिसियों के प्रीमियम तय करना जारी रखेंगी।

बिना इंश्योरेंस ड्राइविंग पर लगाम लगाने के लिए टेक्नोलॉजी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का एक बड़ा मकसद इंश्योरेंस नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। 2018 में मल्टी-ईयर इंश्योरेंस के पिछले निर्देशों के बावजूद, यह देखा गया है कि भारतीय सड़कों पर बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के चल रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, कोर्ट ने मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज और IRDAI को ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो डेटाबेस के साथ इंटीग्रेट करने का निर्देश दिया है। यह सिस्टम अधिकारियों को बिना वैलिड इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान करने और ई-चालान जारी करने में मदद करेगा, जिससे मैन्युअल चेकिंग की जगह रियल-टाइम इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग हो सकेगी।

निवेशक और इंडस्ट्री पर असर

भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए, इस कदम से टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, जिस पर निवेशक किसी भी मांग पर असर के लिए नजर रख सकते हैं, खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील दोपहिया सेगमेंट में। वहीं, जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए, यह नियम लॉन्ग-टर्म प्रीमियम कलेक्शन को बढ़ावा देता है और बिना इंश्योरेंस वाले लायबिलिटी क्लेम को कम करके इंश्योरेंस कंपनियों की एसेट क्वालिटी को बेहतर बनाने में मदद करता है। एडिशनल कवर के लिए स्टैंडर्ड ऑप्शन फॉर्म की ओर यह बदलाव, बंडल इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री को भी कम करने की उम्मीद है, जिससे डीलरों और इंश्योररों द्वारा ऐड-ऑन कवर बेचने के तरीके में बदलाव आ सकता है। अगले चरण में IRDAI द्वारा ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करना और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के साथ मिलकर नए ऑप्शनल कवर लेयर्स के लिए स्टैंडर्ड पॉलिसी वर्डिंग्स को अंतिम रूप देना शामिल होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.