सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) अब टू-व्हीलर्स के लिए एबीएस (ABS) या सीबीएस (CBS) जैसी खास टेक्नोलॉजी को अनिवार्य बनाने के बजाय परफॉरमेंस-आधारित सुरक्षा मानकों (Performance-based safety standards) की ओर बढ़ रहा है। इस बदलाव का मकसद लागत कम करना और इनोवेशन को बढ़ावा देना है, साथ ही ब्रेकिंग परफॉरमेंस के लिए सुरक्षा के तय मानकों को बनाए रखना है।
Detailed Coverage
टेक्नोलॉजी चुनने की मिलेगी छूट
भारत में टू-व्हीलर्स के लिए नियमों को बदलने की तैयारी चल रही है। अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) एक ऐसा फ्रेमवर्क लाने वाला है जो परफॉरमेंस पर आधारित होगा। अभी तक कंपनियां ABS या CBS जैसी खास टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए मजबूर थीं, चाहे उनका व्हीकल डिजाइन कुछ भी हो। लेकिन नए नियमों के तहत, मंत्रालय यह तय करेगा कि वाहन कितनी दूरी में रुकना चाहिए या ब्रेकिंग कितनी असरदार होनी चाहिए।
मैन्युफैक्चरर्स के लिए फायदे
यह बदलाव टू-व्हीलर कंपनियों, खासकर एंट्री-लेवल बाइक्स और स्कूटर्स बनाने वालों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। अब वे अपनी जरूरत के हिसाब से सबसे सस्ती या सबसे असरदार टेक्नोलॉजी चुन सकेंगे। इससे डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस बेहतर होगा और लागत कम होगी। कंपनियां अब किसी खास टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर या हार्डवेयर पर निर्भर नहीं रहेंगी।
ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के करीब
यह कदम भारत के व्हीकल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को दुनिया के बाकी देशों के करीब लाएगा, जहां परफॉरमेंस-आधारित टेस्टिंग आम है। सरकार का मकसद यह है कि ब्रेकिंग असरदार हो और गाड़ी स्टेबल रहे, जिससे सड़क हादसों में कमी आए। खास तौर पर, यह उन बाइक्स और स्कूटर्स पर लागू होगा जो भारत के टू-व्हीलर मार्केट का एक बड़ा हिस्सा हैं। इससे पब्लिक सेफ्टी और मैन्युफैक्चरर्स पर पड़ने वाले दबाव के बीच एक सही बैलेंस बनाने की कोशिश की जा रही है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आगे चलकर, यह देखना होगा कि मंत्रालय इस बारे में क्या फाइनल नोटिफिकेशन जारी करता है। इंडस्ट्री इस फ्लेक्सिबिलिटी का स्वागत कर रही है, लेकिन प्रोडक्शन कॉस्ट और प्रॉफिट मार्जिन पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए सेफ्टी टारगेट कितने सख्त रखे जाते हैं। अगर टारगेट बहुत ज्यादा मुश्किल हुए, तो कंपनियों को लागत बढ़ानी पड़ सकती है। लेकिन अगर स्टैंडर्ड्स प्रैक्टिकल रहे, तो यह भारतीय टू-व्हीलर मार्केट की कीमत-संवेदनशीलता (price-sensitive nature) को ध्यान में रखते हुए सेफ्टी को बेहतर बनाने में मदद करेगा। निवेशकों को इस बदलाव के लागू होने की टाइमलाइन पर नजर रखनी चाहिए।
