NITI Aayog ने राज्यों से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सब्सिडी के पैटर्न को बदलने की अपील की है। अब आम ग्राहकों को मिलने वाली सब्सिडी के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कमर्शियल फ्लीट्स पर फोकस होगा। FY26 में EV पेनिट्रेशन **8.5%** पहुंचने के बाद, सरकार का लक्ष्य **₹1.27 लाख करोड़** के निवेश का अधिकतम फायदा उठाना है।
भारत सरकार अपनी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्ट्रैटेजी को एक नई दिशा दे रही है। NITI Aayog का मानना है कि अब वक्त 'पॉलिसी बनाने' से आगे बढ़कर 'एग्जीक्यूशन' (Execution) पर फोकस करने का है। इसी के तहत राज्यों को सुझाव दिया गया है कि वे इलेक्ट्रिक बसों, टैक्सियों और लॉजिस्टिक्स फ्लीट्स को प्राथमिकता दें।
हाई-यूटिलिटी सेगमेंट पर सरकार की नजर
इस बदलाव का मकसद सरकारी खर्च का सही रिटर्न पाना है। जो वाहन दिन भर सड़कों पर चलते हैं, उनमें इलेक्ट्रिक तकनीक इस्तेमाल करने से पेट्रोल-डीजल की खपत सबसे ज्यादा कम होगी। सरकार का यह कदम चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल को भी शहरी गलियारों (Urban Corridors) में अधिक सटीक बनाएगा। देश ने अब तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक का कमिटमेंट किया है, और अब नीति निर्माता सिर्फ बिक्री के आंकड़ों के बजाय ग्रोथ की क्वालिटी पर ध्यान दे रहे हैं। अगले कुछ वर्षों में 10 से ज्यादा राज्यों की EV पॉलिसी खत्म होने वाली है, जिससे इस बदलाव का मौका एकदम सही है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
जो कंपनियां सिर्फ रिटेल सब्सिडी पर निर्भर हैं, उनके लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं, कमर्शियल फ्लीट्स, इलेक्ट्रिक बस बनाने वाली कंपनियों और इंफ्रा सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए सरकारी टेंडर और डिमांड में स्थिरता देखने को मिल सकती है। अब निवेशकों को उन कंपनियों पर दांव लगाने की जरूरत है, जो केवल गाड़ियां नहीं, बल्कि फाइनेंसिंग, बैटरी मैनेजमेंट और चार्जिंग सर्विस जैसे इंटीग्रेटेड समाधान दे सकती हैं।
चुनौतियां और जोखिम
हालांकि, यह बदलाव रिस्क-फ्री नहीं है। कमर्शियल व्हीकल्स की शुरुआती लागत बहुत ज्यादा होती है, जिसके लिए नए लीजिंग और फाइनेंसिंग मॉडल्स की सख्त जरूरत है। इसके अलावा, चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। आने वाले समय में PACT (Platform for Aggregating Clean Transport) और 'जीरो एमिशन ट्रक मार्केटप्लेस' जैसे मॉडल्स पर निवेशकों की नजर होनी चाहिए।
