कंसोलिडेटेड फ्रंट पर, NDR Auto Components का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस में पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) के मुकाबले 18.89% की जोरदार बढ़ोतरी हुई, जो अब ₹20,829.39 लाख हो गया है। अगर पिछली तिमाही (Q2 FY26) से तुलना करें तो रेवेन्यू में 4.17% का इजाफा देखने को मिला। वहीं, कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 13.50% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई, जो ₹1,519.41 लाख रहा। कंसोलिडेटेड डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) भी 13.50% बढ़कर ₹6.39 पर पहुंच गया।
वहीं, स्टैंडअलोन स्तर पर भी रेवेन्यू में कंसोलिडेटेड ग्रोथ के अनुरूप 18.89% की सालाना वृद्धि देखी गई। लेकिन, स्टैंडअलोन PAT में पिछली तिमाही (Q2 FY26) की तुलना में 10.64% की गिरावट आई, और यह ₹1,241.75 लाख पर आ गया। पिछली तिमाही में यह ₹1,389.51 लाख था। इसी तरह, स्टैंडअलोन डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) में भी 10.62% की तिमाही गिरावट दर्ज हुई, जो ₹5.22 रहा।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी की बात करें तो कंसोलिडेटेड EBITDA में 22.94% की सालाना बढ़ोतरी हुई है, जो ₹2,189.55 लाख रहा। EBITDA मार्जिन में भी सुधार देखा गया, जो Q3 FY26 में बढ़कर 10.51% हो गया, जबकि Q3 FY25 में यह 10.16% था।
कंपनी की ओर से किसी खास एनालिस्ट कॉन कॉल (Con Call) या मैनेजमेंट कमेंट्री का विस्तृत डेटा उपलब्ध नहीं था, ऐसे में नतीजों के पीछे की और गहरी वजहें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।
टैक्स का अनिश्चित बादल:
एनडीआर ऑटो कंपोनेंट्स के लिए सबसे बड़ी और तत्काल चिंता इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से ₹502.20 लाख (पेनल्टी को छोड़कर) की डिमांड है। यह डिमांड असेसमेंट ईयर 2020-21 से 2024-25 के लिए आई है, साथ ही पेनल्टी की मांग भी की गई है। कंपनी ने इस डिमांड के खिलाफ अपील दायर कर दी है और मैनेजमेंट को पूरा भरोसा है कि यह मामला उनके पक्ष में सुलझेगा। हालांकि, इस कंटिंजेंट लायबिलिटी (अनिश्चित देनदारी) का यह बड़ा मामला कंपनी के शेयरों पर एक महत्वपूर्ण दबाव और अनिश्चितता का कारण बना हुआ है।
आगे क्या?
निवेशक अब आने वाली तिमाहियों में स्टैंडअलोन PAT के प्रदर्शन और इनकम टैक्स डिमांड से जुड़ी अपील पर क्या नतीजा आता है, इस पर बारीकी से नजर रखेंगे। कंपनी की कंसोलिडेटेड ग्रोथ को बनाए रखने और परिचालन खर्चों को प्रभावी ढंग से कंट्रोल करने की क्षमता भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।