TI Clean Mobility का ब्रांड Montra Electric साल 2030 तक **$1 बिलियन** (करीब **₹9,600 करोड़**) का रेवेन्यू हासिल करने की तैयारी में है। कंपनी अब अपना पूरा ध्यान इलेक्ट्रिक हैवी कमर्शियल व्हीकल्स पर लगा रही है।
हैवी ट्रक सेगमेंट में बड़ा बदलाव
अब तक थ्री-व्हीलर और छोटे कमर्शियल सेगमेंट पर केंद्रित रही Montra Electric ने अपनी स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब स्टील और सीमेंट जैसे उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए हैवी इलेक्ट्रिक ट्रकों के बाजार में उतर रही है। मैनेजमेंट के अनुसार, 2030 तक के रेवेन्यू टारगेट का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं ट्रकों की बिक्री से आएगा।
मार्केट का हाल देखें, तो N3 ट्रक कैटेगरी में हलचल तेज है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में जहां 850 यूनिट्स बिकी थीं, वहीं मौजूदा साल के सिर्फ 5 महीनों में यह आंकड़ा 1,300 यूनिट्स तक पहुंच गया है। कंपनी अपनी तकनीक को भी अपग्रेड कर रही है और 250 kWh से बढ़कर अब 400 kWh और 450 kWh बैटरी कॉन्फ़िगरेशन पर काम कर रही है, जो एक बार चार्ज करने पर 300 किलोमीटर की रेंज देने में सक्षम होंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नियमों की चुनौती
सफलता की राह आसान नहीं है। फिलहाल भारत में हैवी कमर्शियल व्हीकल्स में इलेक्ट्रिक पेनिट्रेशन 1% से भी कम है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण अभी इनका उपयोग सीमित रूटों तक ही हो पा रहा है।
इसके अलावा, PM E-Drive स्कीम को लेकर भी कुछ पेच फंसे हैं। यह स्कीम पुरानी डीजल गाड़ियों को कबाड़ (Scrappage) करने पर सब्सिडी देती है, लेकिन भारत में व्हीकल स्क्रैपेज प्रोसेस फिलहाल स्वैच्छिक है। पिछले 3 सालों में केवल 3,500 ट्रक ही स्क्रैप हुए हैं। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि कंपनी स्क्रैपेज के इन नियमों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की दिक्कतों के बीच अपने इस बड़े लक्ष्य को कैसे हासिल करती है।
